इथेनॉल बना भारत का ब्रह्मास्त्र... होर्मुज संकट के बीच E20 को लेकर PM मोदी का बड़ा दावा

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पीएम मोदी ने इथेनॉल मिश्रण नीति की सराहना की. उन्होंने कहा कि इससे भारत ने कच्चे तेल का आयात घटाकर विदेशी मुद्रा बचाई और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया.

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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत की एक अहम तस्वीर सामने आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की इथेनॉल मिश्रण नीति की तारीफ करते हुए बताया कि इस कदम ने न केवल कच्चे तेल पर निर्भरता घटाई है, बल्कि भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद की है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पहल ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना लागू नहीं होती, तो भारत को विदेशों से करोड़ों बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता. उन्होंने खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का धन्यवाद किया, जिनकी वजह से यह योजना सफल हो सकी. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पहल ने तेल आयात पर खर्च होने वाली बड़ी रकम को बचाया है.

इथेनॉल मिश्रण योजना क्या है?

भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर कच्चे तेल की खपत कम करना है. इससे तीन बड़े फायदे होते हैं- विदेशी मुद्रा की बचत, पर्यावरण को कम नुकसान और किसानों की आय में वृद्धि. सरकार ने इस योजना को तेजी से आगे बढ़ाया है. भारत ने तय समय से पहले ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया. अब 1 अप्रैल से पूरे देश में E20 यानी 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सप्लाई अनिवार्य कर दी गई है.

आगे का लक्ष्य क्या है?

सरकार का लक्ष्य 2030 तक पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 30% तक करना है. यह कदम भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पिछले 10 सालों में इस तरह की नीतियों के चलते भारत ने करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है, जो देश की आर्थिक मजबूती के लिए बड़ी उपलब्धि है.

मिडिल ईस्ट संकट और भारत की चुनौती

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. पीएम ने कहा कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी न हो.

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि यह वैश्विक संकट है और इससे निपटने के लिए शांति, धैर्य और एकता जरूरी है. उनके अनुसार, भारत को अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ना होगा और इसी सोच के साथ देश हर चुनौती का सामना कर सकता है. First Updated : Sunday, 29 March 2026