नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब बातचीत की कोशिशों के बीच एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. दो महीने से जारी इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि बातचीत के लिए वह सरकार के पास नहीं जाएगी. संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर सरकार सच में बातचीत करना चाहती है तो उसे खुद प्रदर्शन स्थल पर आना होगा.
यह बयान संसद मार्च के दौरान हुए हंगामे के दो दिन बाद आया है. इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया था. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद अब बातचीत को लेकर दोनों पक्षों के बीच शर्तों और पहल को लेकर खींचतान जारी है.
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार अगर प्रदर्शनकारियों से बातचीत करना चाहती है तो उसे पहल खुद करनी होगी. उन्होंने कहा कि सरकार को अपना अहंकार छोड़ना होगा और प्रदर्शनकारियों की शर्तों को समझना होगा. CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी संगठन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी सरकार के पास जाकर बातचीत नहीं करेंगे.
उनके मुताबिक, बातचीत जंतर-मंतर पर या किसी तटस्थ स्थान पर हो सकती है. प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग पर अब भी कायम हैं. संगठन का कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा.
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को दोबारा बातचीत के लिए बुलाया था. हालांकि, संगठन ने उनके कार्यालय या आवास पर जाने से इनकार कर दिया. दास के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को पहले भी कई घंटे इंतजार करना पड़ा था.
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों का समय भी महत्वपूर्ण है और अगर सरकार वास्तव में उनकी मांगों पर बात करना चाहती है तो उसे जंतर-मंतर आकर लोगों के बीच बातचीत करनी चाहिए. CJP का कहना है कि सरकार को बातचीत के लिए बुलाने से पहले अपनी गंभीरता दिखानी होगी. संगठन के नेताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक रुख रखती है, तभी आगे की बातचीत का कोई रास्ता निकल सकता है.
दूसरी ओर, सरकार का रुख प्रदर्शनकारियों से अलग दिखाई दे रहा है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, अगर CJP के प्रतिनिधि बातचीत के लिए आते हैं तो सरकार उनसे बात करने के लिए तैयार है. इस तरह दोनों पक्ष बातचीत की पहल एक-दूसरे से करने की उम्मीद कर रहे हैं. हालांकि, इस खींचतान के बीच बुधवार दोपहर प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच दूसरे दौर की बैठक होने की संभावना जताई जा रही है.
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं. उनका दावा है कि एक तरफ सरकार बातचीत की बात कर रही है, जबकि दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है. दीपके ने आरोप लगाया कि CJP के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाने के बाद उनके मोबाइल फोन ले लिए गए. उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरव दास को जेपी नड्डा के आवास पर करीब पांच घंटे तक एक तरह से नजरबंद रखा गया.
दीपके के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को अलग रखना था, ताकि उस दौरान जंतर-मंतर पर संगठन की मौजूदगी कमजोर हो जाए. उन्होंने कहा कि एक तरफ बातचीत का न्योता दिया गया और दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई हुई. हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
इससे पहले सोमवार को जेपी नड्डा ने CJP के दो प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी. उस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार के स्तर पर चर्चा किए जाने का भरोसा दिया था. यह बैठक उस समय हुई थी जब पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था. इस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. इसके बावजूद CJP का धरना लगातार जारी है और बुधवार को आंदोलन 32वें दिन में प्रवेश कर गया. First Updated : Wednesday, 22 July 2026