Hamidullah Death Anniversary: कहानी भोपाल के अंतिम नवाब की जिन्होंने कराची में खोल दी बैंक शाखा, जिन्ना की मौत ने बिगाड़ दिया था पूरा खेल

Hamidullah Death Anniversary: आज ही के दिन यानी 4 फरवरी 1960 को भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह का निधन हुआ था. हमीदुल्लाह कभी भी अपनी रियासत को भारत में विलय करना नहीं चाहते थे. तो चलिए आज उनके पुण्यतिथि पर उनके बारे में कुछ दिलचस्प बाते जानते हैं.

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Hamidullah Death Anniversary: जब देश का बंटवारा हो रहा था तब कुछ रियासतों ने भारत में शामिल होने से मना कर दिया था. इसमें भोपाल जैसी रियासतें भी शामिल थी. ये रियासतें काफी बड़ी और ताकतवर थी जो जिन्ना के संपर्क में थे. उस समय भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह थे. कहा जाता है कि, वो भारत में शामिल होने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे और पाकिस्तान जाने की पूरी योजना भी बना लिए थे. यहां तक उन्होंने रियासत के खजाने का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान भेजकर वहां 'बैंक ऑफ भोपाल' की शाखा खोलने की योजना बना ली थी.

कौन थे भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह-

भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान का पूरा नाम सिकंदर सौलत इफ्तिखार उल मुल्क बहादुर हमीदुल्लाह खान था. उनका जन्म 9 सितंबर 1894 को हुआ था. वह भोपाल के अंतिम सत्तारूढ़ नवाब थे, जिनका 1956 में मध्य प्रदेश राज्य में विलय हो गया. वह 20 अप्रैल 1926 से लेकर 1 जून 1949 तक शासन किए थे. वह पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के बेहद करीबी थे. उनकी मृत्यु (4 फ़रवरी 1960) के बाद उनकी बेटी साजिदा सुल्तान भोपाल की बेगम नवाब बनी थी क्योंकि उनका कोई बेटा नहीं था.

भोपाल के नवाब

जब कराची में 'बैंक ऑफ भोपाल' खोलने की बनाई थी योजना

भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खाँ को पाकिस्तान से बेहद लगाव था. वह कभी भी भारत में नहीं रहना चाहते थे. उनका झुकाव पाकिस्तान के प्रति इतना था कि एक बार वह जनता का सारा पैसा लेकर कराची चले गए और वहां बैंक शाखा खोलने की योजना बनाई थी. उस बैंक का नाम  'बैंक ऑफ भोपाल' था जो पहले से भोपाल में चल रहा था. हालांकि जिन्ना की मौत ने इस योजना पर पानी फेर दिया. जिन्ना की मौत से न केवल पाकिस्तान का घटनाक्रम तेजी से बदला बल्कि भोपाल और हैदराबाद भारत में शामिल होने के लिए मजबूर भी हो गए. न चाहते हुए भी भोपाल रियासत को भारत में विलय होना पड़ा.

जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने पहुंच गए थे नवाब हमीदुल्लाह-

पाकिस्तान क्रॉनिकल के संपादक अक़ील अब्बास जाफ़री ने अपनी पुस्त में लिखा था कि, जब कराची में ख़ुफिया पुलिस के कार्य़लय पर छापा मारा गया तो मालूम हुआ कि, सरकार के उच्च अधिकारियों के फोन रेकॉर्ड किए जाते हैं. इस घटना के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक में इतनी अस्थिरता बढ़ गई कि, वहां चुनाव तक रोकने पर विचार विमर्श होने लगा. उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर मिर्जा थे जो खुद को बचाने के लिए तत्कालीन पीएम फिऱोज ख़ान के खिलाफ साजिश करने लगे.

जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने पहुंच गए थे नवाब हमीदुल्लाह

उन्होंने भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया और अगली ही सूबह नवाब खाँ कराची भी पहुंच गया. एक तरफ जनता चुनाव का इंतजार कर रही थी तो दूसरी तरफ चुनाव को टालने की कवायद शुरू हो गई थी. हालांकि बाद में पाकिस्तान के राजनीतिक हालत के चलते और इस्कंदर मिर्जा के इरादों का पता लगने के बाद नवाब ने कोई भी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. First Updated : Saturday, 03 February 2024