हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक बंद कमरे में सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को स्वीकार किया गया. सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर कुछ भी गलत नहीं हुआ होता, तो हम यहां क्यों होते? ज़रूर कहीं न कहीं कमी रही है, जिसे हमें पहचानना होगा.
बैठक में कई विपक्षी नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था की विफलता पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि हमले के वक्त सुरक्षा बल कहां थे और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की उपस्थिति क्यों नहीं थी. सरकार ने इस पर जवाब देते हुए बताया कि अनंतनाग जिले के बैसरन क्षेत्र को खोलने से पहले स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों को सूचित नहीं किया था, जबकि यह इलाका आमतौर पर जून तक प्रतिबंधित रहता है.
घटना स्थल की भौगोलिक स्थिति को भी देरी की एक वजह बताया गया. अधिकारियों ने कहा कि जिस स्थान पर हमला हुआ, वह जगह 45 मिनट की कठिन चढ़ाई पर स्थित थी और ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए कोई निर्धारित प्रक्रिया (SOP) मौजूद नहीं थी.
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी राजनीतिक दल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हैं और सरकार को हर जरूरी कदम उठाने के लिए समर्थन देने को तैयार हैं. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार को हर प्रकार की कार्रवाई के लिए सहयोग का आश्वासन दिया.
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए. यह बैठक पुलवामा हमले और भारत-चीन सीमा विवाद के समय की तरह ही एक द्विदलीय सहयोग की मिसाल बनी. First Updated : Thursday, 24 April 2025