Vikram-1 Launch Today: भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट आज होगा लॉन्च, सफल हुआ तो अंतरिक्ष में बनेगा नया इतिहास
स्काईरूट एयरोस्पेस का निजी रॉकेट विक्रम-1 आज श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा, जो भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण मिशन माना जा रहा है.

नई दिल्ली: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र आज एक नया इतिहास लिखने की दहलीज पर खड़ा है. हैदराबाद स्थित निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) का पहला ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 आज सुबह 11:30 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से लॉन्च किया जाएगा.
'मिशन आगमन' नाम का यह अभियान भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. अगर यह मिशन सफल रहता है, तो भारत वैश्विक निजी लॉन्च बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकेगा.
भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए अहम दिन
विक्रम-1 भारत की पहली निजी कंपनी द्वारा डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है. लॉन्च से पहले रॉकेट के सभी तकनीकी परीक्षण, टेलीमेट्री सिस्टम और ट्रैकिंग सिस्टम की जांच पूरी कर ली गई है. स्काईरूट के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कहा कि जमीन पर सभी जरूरी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं और अब असली परीक्षा उड़ान के दौरान होगी.
क्या है विक्रम-1 की खासियत?
करीब सात मंजिला ऊंचा विक्रम-1 एक आधुनिक लॉन्च व्हीकल है, जिसे पूरी तरह कार्बन कॉम्पोजिट संरचना से तैयार किया गया है. इसमें कंपनी द्वारा विकसित 3डी-प्रिंटेड इंजन और शक्तिशाली सॉलिड रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है. यह रॉकेट लगभग 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है.
Among the payloads on Vikram-1 Test Flight-1 is something truly special—a handwritten postcard from Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi with the words, “Vande Mataram.” 🇮🇳🚀
— Skyroot Aerospace (@SkyrootA) July 17, 2026
It travels to space alongside handwritten messages from our team, investors, policymakers, and… pic.twitter.com/sJajN6NiVJ
मिशन के दौरान विक्रम-1 कई तकनीकी पेलोड को 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने का प्रयास करेगा. इसके साथ कुछ प्रतीकात्मक संदेश भी भेजे जाएंगे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित 'वंदे मातरम्' संदेश, वर्तमान और पूर्व इसरो अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों तथा स्काईरूट टीम के संदेश शामिल हैं.
वैश्विक बाजार में भारत की नई उड़ान
इससे पहले वर्ष 2022 में स्काईरूट ने विक्रम-एस सबऑर्बिटल मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया था. अब विक्रम-1 की सफलता कंपनी के लिए नियमित व्यावसायिक लॉन्च की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है.
दुनियाभर में छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यदि यह मिशन सफल होता है, तो भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक मंच पर नई पहचान बनाएगा. साथ ही यह भी साबित होगा कि भविष्य में इसरो और निजी कंपनियां मिलकर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं.


