पाकिस्तान-चीन भारत में खुलेआम करेगा निवेश! गलवान के बाद मोदी सरकार ने किया बड़ा उलटफेर

विदेशी देशों के लिए भारत सरकार ने एक बड़ी बात कही है. पडोसी देशों की कंपनियां को भारत में निवेश करने के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ेगी. भारत ने नियम में बदलाव कर दिया है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: भारत सरकार ने पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब चीन समेत सभी पड़ोसी देशों की कंपनियां भारत में निवेश करने के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह फैसला 10 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में लिया गया. इससे निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं और अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंच सकता है.

पुराने नियम क्या थे?

2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत ने 'प्रेस नोट 3' जारी किया था. इसके तहत भारत से लगती सीमा वाले देशों (जैसे चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान) से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार से पहले अनुमति लेनी पड़ती थी.

यह नियम सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था. इससे चीन जैसी कंपनियों को भारत में निवेश करना मुश्किल हो गया था.

विदेशी कंपनियां बिना मंजूरी करेंगी निवेश 

अब इन देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश कर सकेंगी बिना अनिवार्य मंजूरी के. यह बदलाव निवेश प्रक्रिया को आसान बनाएगा। इससे व्यापार और उद्योग में तेजी आ सकती है. हालांकि, सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में अभी भी सावधानी बरती जा सकती है.

चीन का FDI में हिस्सा अभी भी कम

यह बदलाव होने के बावजूद भारत में कुल FDI में चीन का योगदान बहुत कम है. अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक चीन से सिर्फ 2.51 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आया है, जो कुल FDI का मात्र 0.32% है. चीन निवेशकों की सूची में 23वें स्थान पर है. 2020 के बाद के तनाव के कारण कई चीनी ऐप्स जैसे टिकटॉक और वीचैट पर भी रोक लगी थी.

व्यापार में मजबूत रिश्ता जारी

FDI कम होने के बावजूद भारत-चीन व्यापार तेजी से बढ़ा है. चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है. 2024-25 में चीन से आयात बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात घटकर 14.25 अरब डॉलर रह गया. इससे व्यापार घाटा 99.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया. 

वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात 38.37% बढ़कर 15.88 अरब डॉलर हुआ, जबकि आयात 13.82% बढ़कर 108.18 अरब डॉलर रहा. घाटा 92.3 अरब डॉलर पर बना रहा. यह बदलाव आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है. इससे अन्य पड़ोसी देशों को भी निवेश का बेहतर मौका मिलेगा. उम्मीद है कि इससे भारत में रोजगार और विकास को नई गति मिलेगी.

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