महाराष्ट्र: खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद खतरनाक हो गया है. यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा संभालता है. रोजाना 20 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल यहां से गुजरता है.
ईरान ने इस जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से प्रभावित कर दिया है और कई जहाजों पर हमले किए हैं. ऐसे में जहाजों के लिए सुरक्षित गुजरना मुश्किल हो गया है.
एक लाइबेरिया ध्वज वाले स्वेजमैक्स टैंकर 'शेनलॉन्ग' ने सऊदी अरब के रास तनूरा बंदरगाह से 1 मार्च को 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लोड किया. इस जहाज के कप्तान एक भारतीय थे, जिन्होंने 29 सदस्यीय क्रू (भारतीय, पाकिस्तानी और फिलिपिनो) के साथ जोखिम भरी यात्रा पूरी की.
यह पहला ऐसा जहाज बना जो युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज से गुजरकर भारत पहुंचा. बुधवार को यह मुंबई बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचा और वहां से कच्चा तेल महुल रिफाइनरियों में उतारा जा रहा है.
ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज 8 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य में था. उसके बाद इसने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) कुछ समय के लिए बंद कर दिया. AIS जहाज की लोकेशन, गति और अन्य जानकारी को अन्य जहाजों और अधिकारियों तक पहुंचाता है, जो सुरक्षा के लिए जरूरी है.
इसे बंद करने से जहाज 'डार्क मोड' में आ जाता है, यानी ट्रैकिंग से गायब हो जाता है. इससे ईरानी हमलों से बचने में मदद मिली. 9 मार्च को यह फिर ट्रैकिंग पर दिखा और कुछ दिनों बाद मुंबई पहुंच गया.
कई अन्य टैंकर जैसे VLCC और स्वेजमैक्स भी AIS से ऑफलाइन है, जिनके गंतव्य भारत, चीन और जापान हैं. भारत सरकार के अनुसार, फारस की खाड़ी में 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज हैं, जिनमें सैकड़ों भारतीय नाविक सवार हैं. कुछ जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिम और पूर्व में फंसे हैं. हाल में एक थाई जहाज पर भी हमला हुआ, जिसकी भारत ने निंदा की. First Updated : Thursday, 12 March 2026