पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है. वरिष्ठ लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने शनिवार को अपनी ही पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा पर तीखा हमला बोला, उन्हें ‘निम्न स्तर का’ और ‘समय की बर्बादी’ बताते हुए कहा कि अब वह उनके बारे में सोचने या बात करने के लायक नहीं हैं. यह बयान दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है.
चार बार सांसद रह चुके कल्याण बनर्जी ने हाल ही में टीएमसी के लोकसभा में मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा के कारण पार्टी के कई सहयोगियों की नजर में वह ‘खलनायक’ की तरह दिखने लगे हैं. उनका कहना था कि उन्होंने महुआ पर ध्यान देकर अपनी ऊर्जा और समय व्यर्थ किया, जो उनकी गलती थी.
श्रीरामपुर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कल्याण बनर्जी ने कहा कि महुआ मोइत्रा मेरी चर्चा का विषय नहीं हैं… वह बहुत निम्न स्तर की हैं. उनकी वजह से मैं कई लोगों के लिए गलत व्यक्ति बन गया हूं. यह समय और ऊर्जा की बर्बादी थी. उन्होंने आगे बताया कि उन्हें एक जूनियर वकील सहयोगी से प्रेरणा मिली, जिसने उन्हें मैसेज कर याद दिलाया कि महुआ अब उनके लिए कोई मुद्दा नहीं हैं और उन्हें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए.
इस बयान पर महुआ मोइत्रा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. हालांकि, पार्टी सूत्रों के अनुसार, कृष्णानगर से सांसद महुआ और कल्याण बनर्जी के बीच पहले से ही कई बार तीखी बहस और सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप हो चुके हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है.
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और नागरिक संवाद के मूल मानकों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. कल्याण बनर्जी का विवादों से पुराना नाता रहा है और महुआ के साथ टकराव ने पार्टी में तनाव का माहौल और बढ़ा दिया है.
कल्याण बनर्जी ने इस दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी बयान दिए थे. उन्होंने कहा कि मैंने दीदी के खिलाफ भी बोला था, लेकिन अब लगता है कि ऐसा न कहना बेहतर होता. रक्षाबंधन पर ममता से बातचीत को लेकर उन्होंने बताया कि दीदी ने उन्हें तीन बार आशीर्वाद दिया.
4 जुलाई को कल्याण बनर्जी ने मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया था. उनका आरोप था कि सांसदों के बीच समन्वय की कमी के लिए उन्हें अनुचित रूप से दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि कुछ सांसद संसद में शायद ही आते हों. उन्होंने कहा कि एक साथी सांसद के अपमानजनक व्यवहार पर पार्टी की चुप्पी ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया. यह इस्तीफा ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक के तुरंत बाद आया, जिसमें उन्होंने संसदीय दल के कमजोर समन्वय पर नाराज़गी जताई थी.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कल्याण और महुआ के बीच तनाव कई महीनों से चल रहा था. पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद के साथ भी कल्याण का टकराव हुआ था. विवाद की शुरुआत उस समय मानी जाती है जब स्कूलों में पुलिस तैनाती के सवाल पर कल्याण ने कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिस पर महुआ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.
कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा का यह विवाद टीएमसी के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है. एक ओर, यह आंतरिक अनुशासन और एकजुटता पर सवाल खड़े करता है, वहीं दूसरी ओर, विपक्ष को सत्तारूढ़ दल की कमजोरी उजागर करने का मौका देता है. अब देखना होगा कि ममता बनर्जी इस मतभेद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती हैं या यह विवाद आगे और बढ़ता है.
First Updated : Sunday, 10 August 2025