TMC में सियासी घमासान, दो हफ्तों में दूसरी बार ममता बनर्जी ने EC को भेजी नई कार्यसमिति सूची
पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों गंभीर आंतरिक संकट और नेतृत्व संघर्ष का सामना कर रही है. इसी बीच ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक नई संशोधित सूची भेजी है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों गंभीर आंतरिक संकट और नेतृत्व संघर्ष का सामना कर रही है. जानकारी के अनुसार पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और बागी गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक नई संशोधित सूची भेजी है. वहीं हैरानी की बात ये है कि ये सूची बीतें दो हफ्तों में दूसरी बार भेजी गई है. वहीं इस कदम को पार्टी संगठन पर पकड़ मजबूत करने और अपने नेतृत्व को लेकर किसी भी तरह के विवाद को रोकने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची
सूत्रों के मुताबिक, नई सूची 22 जून की तारीख के साथ चुनाव आयोग को सौंप दी गई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों ने टीएमसी के भीतर शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है, जिसके चलते पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करना पड़ा.
बागी गुट ने की अलग कार्यसमिति की घोषणा
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन ममता बनर्जी की ओर से नई सूची भेजी गई, उसी दिन पार्टी के बागी गुट ने भी अपनी अलग कार्यसमिति की घोषणा कर की. इस गुट ने अपने संगठनात्मक ढांचे में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों को शामिल नहीं किया है. बता दें, बागी नेताओं ने पूर्व मंत्री और विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाया है, जबकि कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
चुनाव के बाद बदली राजनीतिक परिस्थितियां
दूसरी ओर, ममता बनर्जी द्वारा भेजी गई संशोधित सूची में उन्हें पार्टी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा गया है. हाल ही में विधानसभा चुनावों में अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन और पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को देखते हुए 5 जून को भी नई कार्यसमिति का गठन किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल गई हैं.
संगठन से अलग हुए कई प्रमुख चेहरे
इस दौरान पार्टी के कई प्रमुख चेहरे संगठन से अलग हो गए है. इस दौरान कुछ नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जबकि कुछ ने बागी खेमे का साथ पकड़ लिया. इसके बाद ममता बनर्जी ने नई समिति से उन सभी नेताओं को बाहर कर दिया और कुछ नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं.
इसी बीच पार्टी के वित्तीय मामलों को लेकर भी विवाद सामने आया है. एक वरिष्ठ नेता ने पार्टी खातों में लेन-देन पर रोक लगाने की मांग करते हुए बैंक अधिकारियों को पत्र लिखा है, जिससे विवाद और गहरा गया है. अब दोनों गुट अपनी-अपनी वैधता का दावा कर रहे हैं. ऐसे में सबकी नजरें चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि पार्टी का आधिकारिक नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचा किसे माना जाएगा.


