विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नीदरलैंड में एक साक्षात्कार के दौरान आतंकवाद को लेकर भारत की स्पष्ट और आक्रामक नीति को दोहराया. उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद का "निश्चित रूप से अंत" चाहता है और अगर पाकिस्तान की सरज़मीन से दोबारा कोई हमला होता है, तो भारत फिर से सीधा जवाब देगा. उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की याद दिलाते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इसी जवाबी रणनीति का हिस्सा था.
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की जमीन पर मौजूद आतंकवादियों को छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने दो टूक कहा, "अगर आतंकी पाकिस्तान में हैं, तो हम वहीं वार करेंगे, जहां वे छिपे हैं." उन्होंने इस अभियान को "संदेशवाहक कार्रवाई" करार देते हुए कहा कि यह गोलीबारी या युद्ध जैसी कार्रवाई नहीं है, बल्कि आतंकियों को उनके घर में जाकर खत्म करने की रणनीति है.
जयशंकर ने आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल कई 'सबसे कुख्यात' आतंकवादी पाकिस्तान में मौजूद हैं और वे बड़े शहरों में खुलकर घूमते हैं. उन्होंने कहा, "सरकार इसमें शामिल है और पाकिस्तान की सेना इसमें पूरी तरह लिप्त है." उन्होंने इस बात को खारिज किया कि पाकिस्तान को नहीं पता कि देश में क्या चल रहा है. "हमें उनके पते, गतिविधियां और आपसी संपर्कों की पूरी जानकारी है," उन्होंने कहा.
22 अप्रैल के हमले के जवाब में भारत ने छह और सात मई की रात ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकियों के नौ ठिकानों पर सटीक हमले किए. इसके बाद पाकिस्तान ने 8 से 10 मई तक भारतीय सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने हर कोशिश को विफल किया. इसके बाद 10 मई को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने घोषणा की कि भारत और पाकिस्तान सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमत हो गए हैं.
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संघर्ष विराम का श्रेय लेने पर जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की सहमति सीधे संवाद के माध्यम से हुई. उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित सभी देशों को यह साफ कर दिया गया था कि भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं चाहता. "अगर पाकिस्तान को लड़ाई बंद करनी है तो उसे हमें सीधे बताना होगा और यही हुआ."
जयशंकर ने कहा कि संघर्ष विराम का मतलब यह नहीं है कि भारत चुप रहेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ने दोबारा आतंकी हमलों की छूट दी, तो भारत फिर से हमला करेगा. "हमारा संदेश स्पष्ट है: आतंकवाद का अंत चाहिए, नहीं तो परिणाम भुगतने होंगे. पाकिस्तान को यह अच्छी तरह समझना होगा." First Updated : Friday, 23 May 2025