भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव में हालिया घटनाओं ने एक बार फिर LoC (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से लगातार फायरिंग की घटनाओं के बाद, नागरिकों की सुरक्षा के लिए बंकरों की संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है. हाल ही में पाकिस्तान द्वारा की गई फायरिंग में कई लोगों की जान गई, जिससे यह सवाल उठने लगे कि इतने सालों बाद भी क्यों LoC पर बंकरों की पर्याप्त संख्या नहीं है.
जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू के अनुसार, राज्य में अभी तक 9500 बंकर बनाए गए हैं, लेकिन इनकी संख्या अभी भी नाकाफी है. उन्होंने कहा कि बंकरों की मांग बढ़ रही है और सरकार इसे पूरा करने के लिए काम कर रही है. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी बंकरों की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि बंकर तनाव के दौरान नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि संवेदनशील क्षेत्रों में बंकरों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए.
बंकरों की कमी सिर्फ नागरिक क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि सैन्य क्षेत्रों में भी देखी जा रही है. राजौरी, पुंछ और नगरौटा जैसे इलाकों में जहां सैनिकों के परिवार रहते हैं, वहां भी सुरक्षा के लिहाज से बंकरों की भारी कमी है. 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान द्वारा किए गए ड्रोन हमलों के दौरान सैनिकों के परिवारों ने बिस्तरों के नीचे छिपकर अपनी जान बचाई. यदि इन क्षेत्रों में पर्याप्त बंकर होते तो परिवार आसानी से इन सुरक्षा कवचों में शरण ले सकते थे.
बंकरों के निर्माण में भारी खर्च आता है, और भारतीय अधिकारियों का मानना है कि इजराइल जैसे देशों में घर-घर बंकर की व्यवस्था है, लेकिन भारत में इसकी संख्या बढ़ाना समय-साध्य है. इजराइल की तुलना में भारत की आबादी अधिक है और संसाधनों की भी कमी है. हालांकि, भारत सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं, विशेषकर मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में, जब जम्मू, कठुआ, सांबा, पुंछ और राजौरी जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में बंकरों का निर्माण शुरू किया गया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ‘मोदी बंकर’ नामक बंकरों की योजना शुरू की गई. इन बंकरों की डिजाइन बेहद मजबूत और बुलेटप्रूफ होती है, और ये 10 फीट गहरे होते हैं. सरकार ने शुरू में 14,460 बंकरों के निर्माण की मंजूरी दी थी, बाद में 4000 और बंकरों की मंजूरी दी गई.
पिछले हफ्ते पाकिस्तान द्वारा की गई सीमा पर फायरिंग के दौरान, कई लोग बंकरों में छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहे. तंगधार क्षेत्र के एक निवासी ने बताया कि बंकरों ने ही उनकी जान बचाई. शतपल्ला गांव के 100 से अधिक लोग पांच दिन तक बंकरों में रहे, जबकि बाहर तोपखाने के गोले गिर रहे थे.
गृह मंत्रालय ने कर्नाह इलाके में 60 बंकरों के निर्माण की मंजूरी दी थी, लेकिन भूभाग की कमी के कारण उन्हें छोटे बंकरों में बदल दिया गया. कुछ लोग अपनी व्यक्तिगत भूमि पर भी बंकर बना रहे हैं, लेकिन वे आर्टिलरी फायरिंग को सहन करने में सक्षम नहीं हैं. First Updated : Wednesday, 14 May 2025