नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और समझौते की दिशा में प्रगति के बाद भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. भारतीय ध्वज वाला एलएनजी जहाज 'दिशा' तीन महीने से अधिक समय तक युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में फंसे रहने के बाद सुरक्षित रूप से बाहर निकल चुका है.
यह जहाज 18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है. इसके सफलतापूर्वक निकलने से फारस की खाड़ी में फंसे 34 अन्य जहाजों के लिए भी रास्ता खुलने की उम्मीद बढ़ गई है.
फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों में बड़ी मात्रा में तेल, गैस और उर्वरक मौजूद हैं. इनमें कम से कम 16 जहाज उर्वरक लेकर खड़े हैं. यदि इन जहाजों को भी जल्द मंजूरी मिलती है तो भारत में ऊर्जा और कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकती है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तेल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लगेगा.
संघर्ष के दौरान पश्चिम एशिया के कई महत्वपूर्ण गैस संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है। कतर का रास लफ्फान और यूएई का हबशान गैस प्लांट प्रभावित हुए हैं. हालांकि मरम्मत का काम जारी है, लेकिन इन संयंत्रों की पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने में समय लगेगा. भारत की गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से आता है, इसलिए उत्पादन बहाली पर सभी की नजर बनी हुई है.
भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (एससीआई) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा संचालित 'दिशा' जहाज 62,370 टन एलएनजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है. यह युद्धविराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने वाले शुरुआती वाणिज्यिक जहाजों में शामिल है. जहाज को पेट्रोनेट एलएनजी ने कतर से गैस ढुलाई के लिए चार्टर पर लिया था.
सरकार ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में करीब 18,000 भारतीय नाविक कार्यरत हैं. उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन संचालित की जा रही है. अब तक 3,500 से अधिक नाविकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है. वहीं, होर्मुज क्षेत्र में अभी भी कई भारतीय जहाज और सैकड़ों भारतीय नाविक तैनात हैं, जिनकी सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. First Updated : Tuesday, 16 June 2026