भोपाल में लगी देश की पहली ‘एल्गी ट्री’ मशीन... करेगी 25 पेड़ों जितना काम, गर्मी और प्रदूषण से मिलेगी राहत
भोपाल में देश की पहली ‘एल्गी ट्री’ तकनीक शुरू की गई है, जो कम जगह में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड सोखने का दावा करती है. इसे बढ़ते प्रदूषण और हीटवेव से निपटने की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है.

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है. बढ़ते प्रदूषण, गर्मी और खराब होती हवा के बीच शहर में ऐसी तकनीक की शुरुआत हुई है, जिसे भविष्य के ‘स्मार्ट ग्रीन सॉल्यूशन’ के तौर पर देखा जा रहा है. खास बात यह है कि यह पहल देश में पहली बार की गई है. भोपाल के अशोका गार्डन इलाके स्थित विवेकानंद पार्क में आधुनिक ‘एल्गी ट्री’ तकनीक को लगाया गया है, जो हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन छोड़ने का काम करती है. पर्यावरण विशेषज्ञ इसे आने वाले समय के लिए काफी उपयोगी मान रहे हैं.
यह नई तकनीक माइक्रोएल्गी पर आधारित है. माइक्रोएल्गी बेहद छोटे जीव होते हैं, जो प्राकृतिक तरीके से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन तैयार करते हैं. इसी सिद्धांत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर ‘एल्गी ट्री’ तैयार किया गया है. इसे मशरूम वर्ल्ड ग्रुप ने विकसित किया है. कंपनी का दावा है कि इस तकनीक की एक यूनिट लगभग 25 बड़े पेड़ों के बराबर कार्बन सोखने की क्षमता रखती है. इसके जरिए हर साल करीब 1.5 टन तक कार्बन डाइऑक्साइड को कम किया जा सकता है. ऐसे में यह तकनीक शहरों में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
दो साल की रिसर्च के बाद तैयार हुआ मॉडल
कंपनी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर करीब दो वर्षों तक लगातार काम किया गया. इस दौरान वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और रिसर्च एक्सपर्ट्स की बड़ी टीम ने इसकी डिजाइन और कार्यप्रणाली पर शोध किया. बताया गया कि 50 से ज्यादा विशेषज्ञों ने मिलकर इस तकनीक को विकसित किया है. इस सिस्टम को खास तौर पर शहरी इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां जगह की कमी होती है. यही वजह है कि यह कम जगह में भी प्रभावी तरीके से काम कर सकता है. इसे पार्क, बाजार, ट्रैफिक सिग्नल, सरकारी संस्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से लगाया जा सकता है.
प्रदूषण और हीटवेव से राहत की उम्मीद
बीते कुछ वर्षों में बड़े शहरों में प्रदूषण और तापमान दोनों तेजी से बढ़े हैं. वाहनों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों का उत्सर्जन और लगातार घटती हरियाली शहरों की हवा को खराब कर रही है. ऐसे में ‘एल्गी ट्री’ जैसी तकनीक को राहत देने वाले विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक सिर्फ कार्बन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद कर सकती है. साथ ही यह लोगों को साफ और बेहतर हवा उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकती है.
भोपाल बना देश का पहला शहर
इस तकनीक को सार्वजनिक स्थान पर लागू करने वाला भोपाल देश का पहला शहर बन गया है. विवेकानंद पार्क में लगाए गए ‘एल्गी ट्री’ को देखने के लिए लोगों में उत्साह भी देखा जा रहा है. कई लोग इसे पर्यावरण के लिए भविष्य की बड़ी पहल मान रहे हैं. कंपनी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस तकनीक को देश के दूसरे शहरों तक भी पहुंचाया जाएगा. यदि भोपाल में यह प्रयोग सफल रहता है, तो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों में भी इसे लगाया जा सकता है.


