पति की उम्र 40 साल, मेरी केवल 19... परिवार को छोड़कर युवती ने प्रेमी को चुना, अदालत ने भी दी मंजूरी

19 वर्षीय युवती ने अदालत में स्पष्ट कहा कि वह अपनी मर्जी से जीवन जीना चाहती है. उसने पति और परिवार के साथ रहने से इनकार करते हुए अपने साथी को चुना, जिस पर अदालत ने भी सहमति जताई.

Shraddha Mishra

9 साल की एक युवती ने अदालत कक्ष में अपने पति, माता-पिता और प्रेमी के सामने अपने जीवन का सबसे बड़ा फैसला सुनाया. युवती ने बिना किसी हिचक के अदालत से कहा कि वह बालिग है और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती है. उसने साफ शब्दों में बताया कि वह न तो अपने पति के साथ रहना चाहती है और न ही अपने माता-पिता के पास लौटना चाहती है. उसका फैसला था कि वह अपने साथी के साथ ही आगे का जीवन बिताना चाहती है.

यह पूरा मामला तब सामने आया, जब उसके पति अवधेश ने शादी के लगभग एक साल बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. अवधेश ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी को एक अन्य व्यक्ति अनुज कुमार ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है. इस पर अदालत ने पुलिस को युवती को ढूंढकर पेश करने का निर्देश दिया. पुलिस ने युवती का पता लगाया और उसे अदालत में पेश करने से पहले एक सुरक्षित केंद्र में रखा गया. सुनवाई के दिन उसके माता-पिता, पति और उसका साथी मौजूद थे.

शादी में नहीं था संतुलन

सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीशों ने युवती से उसकी इच्छा पूछी, तो उसने अपने वैवाहिक जीवन के बारे में खुलकर बात की. उसने बताया कि उसके और उसके पति के बीच 21 साल के आयु कd अंतर (वह 19 साल की थीं और उनके पति 40 साल के), जिससे रिश्ते में संतुलन नहीं बन पाया. उसने यह भी कहा कि वह इस शादी में खुश नहीं थी और उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा.

अदालत ने युवती को एक बार फिर सोचने का मौका देने के लिए परामर्श की व्यवस्था भी करवाई. लेकिन इसके बाद भी उसका निर्णय वही रहा. उसने दोबारा स्पष्ट किया कि वह अपने साथी के साथ ही रहना चाहती है. उसके साथी ने भी अदालत को भरोसा दिलाया कि वह उसकी देखभाल करेगा और उसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखेगा.

अदालत ने अधिकार को दी प्राथमिकता

सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि युवती बालिग है और उसे अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है. जब यह स्पष्ट हो गया कि वह किसी दबाव में नहीं है, तो पति की याचिका का आधार कमजोर पड़ गया. अदालत ने उसे अपने साथी के साथ जाने की अनुमति दे दी और यह साफ कर दिया कि एक वयस्क व्यक्ति को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किसके साथ और कहां रहना चाहता है. हालांकि अदालत ने युवती की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक खास व्यवस्था भी की. अगले छह महीनों तक एक अधिकारी उसकी स्थिति पर नजर रखेगा और समय-समय पर उससे संपर्क बनाए रखेगा, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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