महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं थे, लेकिन...मनरेगा का नाम बदलने पर संसद में भड़की प्रियंका गांधी, बोली- नया बिल मूल भावना के खिलाफ

आज यानी मंगलवार को लोकसभा में मनरेगा का नाम बदलने वाला बिल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा पेश किया गया. अब इस योजना को VB-जी राम जी के नाम से जाना जाएगा. प्रियंका गांधी ने इस योजना के नाम बदले जाने का विरोध किया. इस दौरान जब भाजपा सांसदों ने कुछ कहा तो उसके जवाब में प्रियंका गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं थे, लेकिन परिवार के मेंबर जैसे ही थे.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : लोकसभा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर VB-जी राम जी किए जाने से जुड़ा विधेयक पेश होते ही संसद में सियासी घमासान शुरू हो गया. इस विधेयक को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में पेश किया, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार की मंशा, नीति और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए. विपक्षी दलों का कहना है कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि इससे योजना की मूल भावना और संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है.

योजना का नाम बदलने से अतिरिक्त खर्च होता है...

आपको बता दें कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सरकार एक ओर केंद्र के अधिकार बढ़ा रही है, लेकिन दूसरी ओर योजना की फंडिंग घटाई जा रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि हर योजना का नाम बदलने की सरकार की “सनक” आखिर क्यों है. प्रियंका गांधी ने कहा कि जब भी किसी योजना का नाम बदला जाता है, तो सरकारी कागज़ात, बोर्ड, स्टेशनरी और प्रचार सामग्री पर अतिरिक्त खर्च आता है, जो जनता के पैसे की बर्बादी है.

नया विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ 
उन्होंने यह भी कहा कि नया विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ जाता है. प्रियंका गांधी के मुताबिक, भले ही विधेयक में मजदूरी के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात कही गई है, लेकिन मजदूरी की दर बढ़ाने पर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे मजदूरों को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा.

महात्मा गांधी का नाम हटाने पर आपत्ति
प्रियंका गांधी ने योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने का भी विरोध किया. सदन में भाजपा सदस्यों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी उनके परिवार के सदस्य नहीं थे, लेकिन परिवार जैसे ही थे. उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की सोच या पसंद के आधार पर इतनी महत्वपूर्ण योजना में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए.

राज्यों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
विपक्षी दलों ने यह भी आरोप लगाया कि नए विधेयक के तहत योजना की फंडिंग का बोझ राज्यों पर बढ़ाया जा रहा है. पहले जहां राज्य सरकारों का योगदान करीब 10 प्रतिशत था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है. विपक्ष का कहना है कि इससे राज्यों की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गरीब व ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं.

भगवान राम पूजनीय हैं, लेकिन...
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने भी योजना के नामकरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भगवान राम पूजनीय हैं, लेकिन मौजूदा संदर्भ में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता कहीं अधिक है. उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से राज्यों पर अनावश्यक बोझ डाला जा रहा है, इसलिए उनकी पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है.

कांग्रेस और विपक्ष की मांग
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को ऐसे मंत्री के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाया. उन्होंने इसे गलत और अपमानजनक बताया. वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी कहा कि योजना से गांधीजी का नाम हटाना उनका अपमान है.

पहले संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाए 
विपक्ष ने मांग की कि इस विधेयक को पहले संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाए, जहां सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हो. आवश्यक संशोधन और सुझाव शामिल करने के बाद ही इसे दोबारा सदन में लाया जाए. मनरेगा का नाम बदलने से जुड़ा यह विधेयक केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राजनीतिक, वैचारिक और संघीय ढांचे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है. आने वाले दिनों में इस पर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह व्यापक बहस जारी रहने की संभावना है.

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