नई दिल्ली: गुजरात की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है. छोटा उदयपुर में आयोजित 'गुजरात जोड़ो जनसभा' में हजारों लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने न केवल पार्टी के बढ़ते जनसमर्थन को दिखाया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अब आम आदमी पार्टी राज्य के गांव-गांव में अपनी जड़ें मजबूत कर चुकी है.
इस ऐतिहासिक जनसभा में भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं एवं सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने AAP का दामन थाम लिया. कार्यक्रम को पार्टी के लिए छोटा उदयपुर में अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है. छोटा उदयपुर में उमड़ा जनसैलाब
कार्यक्रम में डेढ़ियापाड़ा के विधायक चैतर वसावा, जिला अध्यक्ष राधिका राठवा, विधानसभा प्रभारी विनुभाई राठवा और छात्र नेता युवराजसिंह जाडेजा मुख्य मंच पर मौजूद रहे. सभा के दौरान भाजपा के चालू कारोबारी अध्यक्ष राजेश राठवा, कई पूर्व सरपंच, कांग्रेस के पूर्व तालुका पंचायत सदस्य और 7,000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी में शामिल होकर पार्टी की ताकत को नई ऊंचाई दी.
विधायक चैतर वसावा ने नए साथियों का पारंपरिक खेस पहनाकर स्वागत किया और कहा, “अब गुजरात में ईमानदार राजनीति की नई कहानी लिखी जाएगी.” उन्होंने यह भी घोषणा की कि आम आदमी पार्टी किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेगी और स्थानीय चुनाव अकेले लड़ेगी.
उन्होंने कहा- 'जनता अब पारंपरिक पार्टियों के भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी से आज़ादी चाहती है, और आम आदमी पार्टी यही बदलाव लेकर आई है.' सभा के दौरान चारों ओर गुजरात में भी केजरीवाल, आम आदमी की सरकार और बदलाव का समय आ गया जैसे नारे गूंजते रहे, जो माहौल को पूरी तरह उत्साह से भर रहे थे.
सभा में जिस तरह भाजपा और कांग्रेस के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी का दामन थामा, उसने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है. माना जा रहा है कि छोटा उदयपुर में यह भीड़ केवल एक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट जनसंदेश थी -गुजरात में बदलाव की लहर अब तेज़ हो चुकी है.
AAP की गुजरात में रणनीति लगातार जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद बनाने पर केंद्रित रही है. पार्टी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर लगातार अभियान चलाए हैं. इन्हीं प्रयासों का नतीजा है कि आज बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक पार्टियों को छोड़कर आम आदमी पार्टी से जुड़ रहे हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छोटा उदयपुर की यह रैली गुजरात की राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकती है. इसने यह दिखा दिया है कि आम आदमी पार्टी अब केवल शहरी नहीं, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है.
AAP की बढ़ती लोकप्रियता और संगठनात्मक शक्ति उसे आगामी 2025 के विधानसभा चुनावों में एक निर्णायक ताकत के रूप में उभार सकती है. First Updated : Wednesday, 29 October 2025