मुंबई में तरबूज खाने से बड़ा हादसा, एक ही परिवार के 4 सदस्यों ने गंवाई जान

मुंबई के भिंडी बाजार में डॉकाडिया परिवार के चार सदस्यों की मौत के मामले में फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में तरबूज के अंदर जिंक फॉस्फाइड यानी चूहे मारने वाला जहर मिला है. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि जहर फल के भीतर कैसे पहुंचा.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

मुंबई के भिंडी बाजार इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. कालिना स्थित फॉरेंसिक लैब की 11 दिनों तक चली जांच और 54 परीक्षणों के बाद यह पुष्टि हुई है कि तरबूज में मौजूद चूहे मारने वाले जहर ने डॉकाडिया परिवार के चार लोगों की जान ले ली. जांच रिपोर्ट में तरबूज और मृतकों के आंतरिक अंगों में जिंक फॉस्फाइड मिलने की पुष्टि की गई है.

फॉरेंसिक अधिकारियों के मुताबिक, जहर फल के भीतर मौजूद था और बाहरी सतह पर किसी तरह के संदूषण के संकेत नहीं मिले. मामले ने पुलिस जांच को नई दिशा दे दी है. अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तरबूज के अंदर यह जहरीला पदार्थ कैसे पहुंचा.

फॉरेंसिक जांच में हुआ बड़ा खुलासा

राज्य फॉरेंसिक लैब के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जिंक फॉस्फाइड, जिसे आमतौर पर चूहे मारने के जहर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तरबूज और मृतकों के विसरा नमूनों में पाया गया. इनमें लीवर, किडनी, प्लीहा, पेट की पित्त और पेट के भीतर मौजूद अन्य तरल पदार्थ शामिल थे.

एक फॉरेंसिक अधिकारी ने कहा, फल पर बाहरी संदूषण का कोई संकेत नहीं था. जहर फल के अंदर था. इंजेक्शन के माध्यम से इसके फल में प्रवेश करने की संभावना नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि अब जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि यह जहरीला पदार्थ फल के भीतर कैसे पहुंचा.

पुलिस सभी एंगल से कर रही जांच

जेजे मार्ग पुलिस ने पुष्टि की है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट उन्हें मिल चुकी है. डीसीपी डॉ. प्रवीण मुंधे ने कहा, रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया जाएगा. फोरेंसिक डॉक्टरों से परामर्श करके आगे की जांच जारी रखी जाएगी. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि तरबूज विक्रेता के स्तर पर जहरीला हुआ या फिर इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है. फिलहाल मामले को हत्या, हादसा या आत्महत्या किस श्रेणी में रखा जाए, इस पर निर्णय नहीं लिया गया है. पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि डॉकाडिया परिवार के घर से चूहे मारने वाला जहर बरामद नहीं हुआ.

कैसे लगा जहर का पता?

फॉरेंसिक अधिकारियों के अनुसार, इस मामले को सुलझाने में सामान्य मामलों की तुलना में अधिक समय लगा. आमतौर पर 10 से 20 परीक्षणों में विषैले तत्वों का पता चल जाता है, लेकिन इस मामले में 54 बार परीक्षण करना पड़ा. एक अधिकारी ने बताया, परिवार ने विष का एक बड़ा हिस्सा उल्टी के माध्यम से बाहर निकाल दिया था, यही कारण है कि शेष बचे हुए अंशों की पहचान करने के लिए 54 दौर के परीक्षण की आवश्यकता पड़ी.

कैसे बिगड़ी हालत?

फॉरेंसिक अधिकारियों ने बताया कि जिंक फॉस्फाइड शरीर के भीतर जाकर फॉस्फीन गैस बनाता है. यह गैस फेफड़ों तक पहुंचने पर शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरा देती है. अधिकारी ने कहा, इसी वजह से सबसे छोटी बच्ची की पहले मौत हो गई. उसका शरीर जहर को सहन नहीं कर सका. प्रतिक्रिया का समय व्यक्ति के शरीर के वजन और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. जिंक फॉस्फाइड के मामलों में, एक बार गैस शरीर में निकल जाने के बाद मृत्यु लगभग निश्चित होती है.

तरबूज खाने के बाद बिगड़ी तबीयत

मृतकों की पहचान अब्दुल्ला डॉकाडिया (44), उनकी पत्नी नसरीन (35), और बेटियों आयशा (16) और जैनब (12) के रूप में हुई है. परिवार भिंडी बाजार के पायधोनी इलाके स्थित मुगल बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर रहता था. बताया गया कि रविवार 26 अप्रैल की रात करीब 1:30 बजे परिवार के केवल इन चार सदस्यों ने तरबूज खाया था. इससे पहले शनिवार रात को परिवार ने पांच अन्य रिश्तेदारों के साथ चिकन पुलाव खाया था. फॉरेंसिक जांच में पुलाव और अन्य खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट निगेटिव आई.

तरबूज खाने के कुछ घंटों बाद चारों को उल्टी, दस्त और बेचैनी की शिकायत हुई. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां एक-एक कर सभी की मौत हो गई. सबसे पहले सुबह करीब 10 बजे जैनब की मौत हुई, जबकि अब्दुल्ला ने रात करीब 10 बजे दम तोड़ा.

डॉक्टरों ने क्या कहा?

पूर्व एफएसएल निदेशक डॉ. रुक्मणी कृष्णमूर्ति ने कहा कि जिंक फॉस्फाइड बेहद जहरीला होता है और इसकी घातक मात्रा बहुत कम होती है. उन्होंने कहा, यह आसानी से उपलब्ध भी है. यह या तो जानबूझकर निगला गया हो सकता है या फिर किसी ने इसे अंदर डाल दिया हो. उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी.

आर्थिक तंगी की अटकलों को पुलिस ने बताया गलत

मामले के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं, लेकिन पुलिस ने इन्हें निराधार बताया. पुलिस ने परिवार की मेडिकल हिस्ट्री की भी जांच की है. जेजे मार्ग पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, हमें आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं मिली हैं, इनकी अभी भी जांच चल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक की जांच में परिवार खुशहाल नजर आया है.

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