टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। यह दौर उस समय से भी ज्यादा परेशान करने वाला है जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से नाता तोड़ कर अपनी अलग पार्टी टीएमसी बनाई थी और बंगाल में वामपंथ की सत्ता को उखाड़ फेंका था हालांकि ममता को उस समय बंगाल में स्थापित करने में अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी का भी योगदान था। उस समय बीजेपी की कमान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों में थी।
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी अब करीब-करीब टूट के कगार पर है बस देखना यह है कि इस टूट का आयाम और आकार कितना बड़ा होगा। अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी अब में दो फाड़ हो सकता है और करीब 60 विधायक ऋतब्रज बनर्जी को समर्थन देने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी पूरी संभावना है कि बुधवार को सारे विधायक एकजुट होकर पश्चिम बंगाल विधान सभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंप सकते हैं। अगर ऐसा होता तो पार्टी 60 और 20 के गुट में बंट जाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि ममता बनर्जी गुट से विपक्ष का दर्ज भी छिन जाएगा। यह ममता के लिए दोहरी मार होगी। एक न्यूज पेपर के अनुसार नए गुट के सदस्यों ने 80 में से 60 विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है। बंगाल के एक नेता तो न्यूज पेपर से बातचीत में यहां तक दावा किया है कि ''मान्यता पाने के लिए हमारा पत्र तैयार है क्योंकी असली टीएमसी तैयार है। हम बुधवार को बंगाल विधानसभा स्पीकर रतींद्रनाथ बोस को पत्र सौंप देंगे''। दावा किया जा रहा है कि सभी विधायक ऋतब्रज बनर्जी की उम्मीदवारी को समर्थन दे रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के मंत्री तपास रॉय ने मंगलवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस में महाराष्ट्र जैसी टूट होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। रॉय का दावा है कि तृणमूल ने कई ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल किया जिनका ना तो जनाधार था और ना ही राजनीति से ज्यादा सरोकार था। उन्होंने दावा किया कि अब पार्टी में अंदरूनी मतभेद और अंतर्विरोध तह पर दिखाई देने लगे हैं।
ऋतब्रज बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में यह स्वीकार किया कि उनकी मुलाकात विधायक हॉस्टल में कुछ विधायकों से हुई। हालांकि उन्होंने यह खुलकर नहीं बताया कि विधायकों से क्या बात हुई और कितने विधायकों से वो मिले। बनर्जी का कहना है कि वह ''एक-एक दिन के हिसाब से आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं।'' हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उनके साथ 50 से ज्यादा विधायक हैं तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। उन्होंने दावा किया कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता निर्वाचित करने संबंधी कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। बनर्जी के अनुसार जिस पर उनके हस्ताक्षर लिए गए थे वह महज उपस्थिति दर्ज करने के लिए था। टीमएसी ने ऋतब्रत समेत दो विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्काषित कर दिया था।
न्यूज एजेंसी वार्ती के अनुसार बंगाल में हार के बाद मंगलवार को पहली बार बड़ी राजनीतिक लाबंदी की। विरोध-प्रदर्शन में कम भीड़ और कई सांसदों विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। बनर्जी के विरोध के लिए वाई-चैनल के बस अड्डे के करीब एक धरना मंच तैयार किया गया था। यहां चंद्रिमा भट्टाचार्य, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, डेरेक ओब्रायन, फिरहाद हकीम और दूसरे सीनियर नेता ममता बनर्जी के साथ मौजूद रहे लेकिन बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलों को और बल दे दिया।
First Updated : Wednesday, 03 June 2026