ईरान ने होर्मुज में भारतीय जहाजों को दी छूट! विदेश मंत्रालय ने ऐलान करते हुए कहा - 'सारी बातें नहीं बता...'

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और जहाजों का आवागमन प्रभावित हो रहा है. भारत इस स्थिति से निपटने के लिए लगातार नजर रखी हुई है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहा है. ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और जहाजों का आवागमन प्रभावित हो रहा है, जिससे दुनिया में ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है. भारत इस स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है.

जयशंकर-ईरानी विदेश मंत्री की बातचीत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि संकट शुरू होने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच तीन बार बात हुई. आखिरी बातचीत में ऊर्जा आपूर्ति और जहाजों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. 

जयसवाल ने स्पष्ट कहा कि इस बातचीत की आगे की डिटेल्स अभी साझा नहीं की जा सकती, क्योंकि यह समय से पहले होगा. भारत कूटनीति के जरिए क्षेत्र में शांति और सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.

ईरान में फंसे भारतीयों की स्थिति

ईरान में लगभग 9,000 भारतीय मौजूद हैं, जिनमें छात्र, व्यापारी, नाविक और तीर्थयात्री शामिल हैं. 24 फरवरी को जारी एडवाइजरी के बाद कई लोग भारत लौट चुके हैं. बचे हुए लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है.

भारतीय दूतावास लगातार उनके संपर्क में है और जो वापस आना चाहते हैं, उनकी व्यवस्था की जा रही है. अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद छात्रों और अन्य नागरिकों को विशेष ध्यान दिया गया है.

ईरानी जहाज को भारत में डॉकिंग की अनुमति

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरान ने 20 फरवरी को तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की मांग की थी. भारत ने 1 मार्च को इसकी मंजूरी दे दी. इनमें से एक जहाज IRIS Lavan 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा. इसका क्रू अभी भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है. यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया था.

शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर 

5 मार्च को विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और भारत की ओर से संवेदना जताई. यह पुस्तिका उसी दिन पहली बार खोली गई थी. भारत सरकार होर्मुज रूट पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सभी कदम उठा रही है.

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