BJP President: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जल्द ही बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है. छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब पार्टी की निगाहें राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर टिक गई हैं. मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनावों को देखते हुए उनका कार्यकाल 2024 तक बढ़ा दिया गया था.
अब जब चुनाव खत्म हो चुके हैं, पार्टी इस अहम पद पर नए चेहरे की तलाश में जुट गई है. सूत्रों के मुताबिक, इस बार बीजेपी पार्टी की कमान किसी महिला नेता को सौंप सकती है. चर्चा में तीन महिला नेताओं के नाम हैं, जिनमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पूर्व आंध्र प्रदेश अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं.
निर्मला सीतारमण 2019 से देश की वित्त मंत्री हैं और बीजेपी की सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं में से एक मानी जाती हैं. वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मजबूत तालमेल रखती हैं और हाल ही में उन्होंने पार्टी मुख्यालय में जेपी नड्डा और बीजेपी महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात भी की थी.
तमिलनाडु से आने वाली सीतारमण का दक्षिण भारत में मजबूत आधार है, जो बीजेपी की दक्षिण विस्तार नीति के लिहाज से भी फायदेमंद हो सकता है. संगठन में उनकी पकड़ और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी सामंजस्य क्षमता उन्हें इस पद के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है.
डी पुरंदेश्वरी, जो पूर्व में आंध्र प्रदेश में बीजेपी की अध्यक्ष रह चुकी हैं, अब राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की रेस में एक अहम नाम बनकर उभरी हैं. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर अभियान का हिस्सा बनकर भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को विदेशों में मजबूती से प्रस्तुत किया था. यह अभियान ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, इटली और डेनमार्क जैसे देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चलाया गया था.
उनकी कूटनीतिक समझ, संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक संतुलन उन्हें एक भरोसेमंद विकल्प बनाते हैं.
वनाठी श्रीनिवासन बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं और 2021 में तमिलनाडु की कोयंबटूर (साउथ) सीट से अभिनेता कमल हासन को हराकर सुर्खियों में आई थीं. 1993 से पार्टी से जुड़ी वनाठी 2022 में बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य भी बनीं.
उनकी राजनीतिक यात्रा और जमीनी पकड़ उन्हें इस दौड़ में एक संभावित विकल्प बनाती है, विशेष रूप से तब, जब पार्टी युवा और महिला मतदाताओं को ध्यान में रखकर रणनीति बना रही है.
बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी महिलाओं के बीच अपनी लोकप्रियता को और मजबूत करने के लिए महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है. हाल के चुनावों में महिला मतदाताओं के बीच बीजेपी की पकड़ मजबूत रही है, और यह बदलाव उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है.
साथ ही, 2023 में पारित हुआ महिला आरक्षण बिल जिसमें लोकसभा और विधानसभा सीटों पर महिलाओं को 33% आरक्षण देने की बात है भी बीजेपी के इस फैसले को मजबूती देता है. अगर पार्टी किसी महिला को अध्यक्ष नियुक्त करती है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि बीजेपी अपने फैसलों और विधायी बदलावों में सामंजस्य बनाए रखना चाहती है. First Updated : Friday, 04 July 2025