8 साल बाद भारत आए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति जे म्युंग से PM मोदी ने की मुलाकात, इन मुद्दों पर हुई खास बात
पीएम मोदी ने आज नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस दौरान उन्होंने कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें आर्थिक रणनीति भी शामिल है.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार 20 अप्रैल को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. यह बैठक दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा का मुख्य हिस्सा थी. दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत और दक्षिण कोरिया के आर्थिक तथा रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की. आइए जानते हैं बैठक में किन-किन मुद्दों पर हुई बात.
बैठक में किन मुद्दों पर हुई बात
दरअसल बैठक में दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण, व्यापार, निवेश, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, उभरती प्रौद्योगिकियां और जन-संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता मौजूदा वैश्विक घटनाओं पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे. इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग को और गहरा करना तथा नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाना है.
#WATCH | Delhi: PM Narendra Modi and Lee Jae Myung, President of South Korea, hold a meeting at the Hyderabad House
— ANI (@ANI) April 20, 2026
(Video: DD News) pic.twitter.com/kg9Qrrjx0f
2030 तक व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
आपको बता दें, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग आठ वर्षों बाद भारत आए हैं. दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाया जाए.
रविवार को दक्षिण कोरियाई समुदाय के साथ रात्रिभोज के दौरान राष्ट्रपति ली ने कहा कि अभी भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग काफी कम है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आगे चलकर दोनों देशों के संबंधों को पूरी तरह नई ऊंचाई पर ले जाना है.
विदेश मंत्री जयशंकर का स्वागत
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति ली का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देगी. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ली की विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता सराहनीय है.
दोनों नेताओं की बैठक से उम्मीद है कि भविष्य में व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग और बढ़ेगा. यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है.


