बेटियों के लिए पंजाब की बड़ी पहल, भगवंत मान सरकार देश की सबसे बड़ी स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा करेगी शुरू

पंजाब में लड़कियों की स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता की दिशा में एक परिवर्तन की शुरुआत हुई है. यह ऐतिहासिक पहल सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक, समावेशी और लड़कियों के अनुकूल बनाने की दिशा में मान सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है.

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चंडीगढ़: पंजाब में लड़कियों की स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता की दिशा में एक परिवर्तन की शुरुआत हुई है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की किशोरियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से देश के सबसे व्यापक स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रमों में से एक का राज्य स्तरीय विस्तार कर दिया है. 'पीरियड फ्रेंडली पंजाब' अभियान के तहत संचालित इस दूरदर्शी पहल का सीधा लाभ राज्य के सभी 23 जिलों के 3,600 से अधिक सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ रही छठी से दसवीं कक्षा की 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को मिलेगा.

​सामाजिक चुप्पी को तोड़ती एक आधुनिक नीति

​यह ऐतिहासिक पहल सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक, समावेशी और लड़कियों के अनुकूल बनाने की दिशा में मान सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियों जिसमें मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को किशोरियों की गरिमा, शिक्षा और समानता का मौलिक अधिकार माना गया है. 

उसका पालन करते हुए पंजाब सरकार ने इस संवेदनशील विषय को सीधे कक्षाओं का हिस्सा बनाया है. पारंपरिक रूप से चुप्पी, सामाजिक संकोच और भ्रांतियों के दायरे में सिमटे इस मुद्दे पर खुलकर संवाद स्थापित करना ही इस नीति का मुख्य एजेंडा है ताकि माहवारी कभी भी किसी मेधावी लड़की की पढ़ाई या हौसले के आड़े न आए.

​अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यावहारिक पाठ्यक्रम

​इस कार्यक्रम को पूरी तरह वैज्ञानिक और व्यावहारिक बनाने के लिए पंजाब सरकार ने मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कार्यरत अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था 'वॉश यूनाइटेड' के साथ हाथ मिलाया है. इस साझेदारी के तहत 'मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट' नामक एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है. स्थानीय परिवेश और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे पाठ्यक्रम को पंजाबी भाषा में ढाला गया है. जिससे छात्राएं बिना किसी हिचकिचाहट के विषयवस्तु को आत्मसात कर सकें.

तीन चरणों वाले विशेष सत्र

​पाठ्यक्रम के अनूठे शिक्षण मॉडल में 'रूबी' नाम की एक 10 वर्षीय काल्पनिक लड़की की कहानी को मुख्य माध्यम बनाया गया है. कहानियों, दृश्य सामग्रियों और सहभागिता आधारित खेल गतिविधियों के जरिए तीन चरणों वाले इस विशेष सत्र में छात्राओं को शरीर में होने वाले जैविक परिवर्तनों, स्वच्छता की सही आदतों और आत्मसम्मान बनाए रखने के तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं.

पंजाब में लड़कियों की शिक्षा 

पंजाब में लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता में एक बड़ा बदलाव आया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा कार्यक्रम शुरू किया है. इस कार्यक्रम का नाम 'पीरियड फ्रेंडली पंजाब' है और इसका मकसद लड़कियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा देना है.

सुरक्षित माहौल का निर्माण

इस कार्यक्रम का फायदा पंजाब के सभी 23 जिलों के 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में पढ़ रही 3.4 लाख से अधिक लड़कियों को मिलेगा. यह कार्यक्रम सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. पंजाब सरकार ने मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को लड़कियों के गरिमा, शिक्षा और समानता का मौलिक अधिकार माना है.

 'वॉश यूनाइटेड'

इस कार्यक्रम को व्यावहारिक और वैज्ञानिक बनाने के लिए पंजाब सरकार ने 'वॉश यूनाइटेड' नामक एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था के साथ मिलकर काम किया है. इस साझेदारी के तहत एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है जिसे पंजाबी भाषा में ढाला गया है. इस पाठ्यक्रम में लड़कियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्वच्छता और आत्मसम्मान बनाए रखने के तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं.

पायलट प्रोजेक्ट के आंकड़े

इस कार्यक्रम को पहले पंजाब के 100 से अधिक स्कूलों में 45,000 लड़कियों के बीच एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आजमाया गया था. इसके परिणाम बहुत अच्छे रहे हैं। 97% शिक्षकों ने नए पाठ्यक्रम के माध्यम से संवाद स्थापित करने में पूर्ण सहजता व्यक्त की है. 94% शिक्षकों ने इस स्वास्थ्य कार्यक्रम को पूरे पंजाब के सभी स्कूलों में लागू करने की सिफारिश की है.

'मास्टर ट्रेनर' के रूप में तैयार

पंजाब सरकार ने इस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है. 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में तैयार किया गया है जिन्होंने राज्यभर के लगभग 7,200 सरकारी स्कूल शिक्षकों को सघन प्रशिक्षण दिया है. इस प्रशिक्षण का मकसद स्कूलों के भीतर एक सुरक्षित और संवेदनशील माहौल तैयार करना है जहां लड़कियां बिना किसी संकोच या डर के मासिक धर्म से जुड़े अपने सवाल रख सकें और प्रामाणिक वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त कर सकें. First Updated : Thursday, 04 June 2026