भगवंत मान सरकार की 'शिक्षा क्रांति' लाई रंग, पहले ही साल छात्र उद्यमों ने कमाए ₹90 करोड़, बने नए बिजनेसमैन

पंजाब के उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में इन दिनों एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. राज्य के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज से निकलने वाले युवा अब केवल नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय खुद के व्यवसाय खड़े कर रहे हैं.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

चंडीगढ़: पंजाब के उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में इन दिनों एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. राज्य के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज से निकलने वाले युवा अब केवल नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय खुद के व्यवसाय खड़े कर रहे हैं. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू की गई 'शिक्षा क्रांति' के तहत राज्यभर में लागू किया गया 'बिजनेस क्लास' कार्यक्रम अब धरातल पर बड़े नतीजे देने लगा है. यह कार्यक्रम बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक., बी.वोकेशनल, आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया गया था. अपने पहले ही वर्ष में इस पहल ने युवाओं की सोच को बदलने और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सफलता हासिल की है.

पहले ही साल में 90 करोड़ का कारोबार

इस महत्वाकांक्षी योजना के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब का युवा वर्ग अवसर मिलने पर क्या कुछ हासिल कर सकता है. कार्यक्रम के पहले वर्ष में राज्यभर के लगभग 95,000 छात्रों ने हिस्सा लिया और अपने व्यावसायिक विचारों पर काम करना शुरू किया. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इनमें से 25,693 विद्यार्थियों ने अपने स्वयं के नए व्यवसाय (स्टार्टअप) स्थापित कर लिए. करीब 20,241 छात्र उद्यमों ने पहले ही शैक्षणिक सत्र में लगभग 90 करोड़ रुपये का विशाल टर्नओवर करके इतिहास रच दिया है.

डिग्री कल्चर से आगे बढ़कर व्यवसाय पर जोर

पारंपरिक शिक्षा प्रणाली अक्सर किताबों, सिद्धांतों और परीक्षाओं तक ही सीमित रह जाती है, जिससे डिग्री मिलने के बाद भी छात्रों को बाजार की व्यावहारिक समझ नहीं होती. इसी खाई को पाटने के लिए पंजाब सरकार ने शिक्षण सत्र में 925 संस्थानों (20 यूनिवर्सिटी, 494 कॉलेज, 320 आईटीआई और 91 पॉलिटेक्निक) में दो-क्रेडिट का अनिवार्य पाठ्यक्रम लागू किया. इस फैसले के नतीजों पर खुशी जताते हुए उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब का बिजनेस क्लास कार्यक्रम शिक्षा के पारंपरिक अर्थ को बदल रहा है. सरकार का उद्देश्य केवल कागज की डिग्रियां बांटना नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले और रोजगार सृजित करने वाले युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है. जब 95,000 में से 25,000 से ज्यादा बच्चे अपने स्टार्टअप शुरू कर देते हैं, तो यह साबित होता है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर हमारे युवा किसी से पीछे नहीं हैं.

किताबों से बाहर निकलकर बाजार की सीख

यह कार्यक्रम छात्रों को केवल सैद्धांतिक बातें नहीं सिखाता, बल्कि उन्हें बिजनेस चलाने के वास्तविक कौशलों से लैस करता है. इसके तहत विद्यार्थियों को बाजार अनुसंधान, ग्राहक की जरूरतों की पहचान, उत्पाद की कीमत तय करना, वित्तीय योजना बनाना, डिजिटल मार्केटिंग और समस्या समाधान जैसे व्यावहारिक हुनर सिखाए जा रहे हैं. इसी का परिणाम है कि करीब 57,000 छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हो चुके हैं. युवा आज ई-कॉमर्स, फूड सर्विस, डिजिटल कंटेंट निर्माण, कोडिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, फिटनेस, ब्यूटी-वेलनेस, हस्तशिल्प और कृषि आधारित उद्यमों में अपने कदम जमा रहे हैं.

कैंपस से निकली सफलता की कहानियां

इस जमीनी क्रांति की एक बेहतरीन मिसाल गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र सौरव हैं. सौरव ने अपने माचा ड्रिंक ब्रांड ‘मॉक, इन माचा’ की शुरुआत की. अपने अनोखे फ्लेवर्स और ताज़गी भरे स्वाद के कारण उनका यह उत्पाद छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ. उन्होंने कॉलेज के कार्यक्रमों और फेस्ट में अपने प्रोडक्ट्स बेचकर करीब 90,000 रुपये की कमाई की. सौरव जैसे हजारों युवा आज पंजाब के अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं.

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