Rahul Gandhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग (EC) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित ‘वोट अधिकार रैली’ में कहा कि आयोग ने हाल ही में लगाए गए उनके आरोपों के जवाब में उनसे शपथपत्र दाखिल करने को कहा है, लेकिन वो पहले ही संसद में संविधान हाथ में लेकर शपथ ले चुके हैं. राहुल गांधी ने दावा किया कि हालिया लोकसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ हुई और चुनाव आयोग, बीजेपी के साथ मिलकर नतीजों में हेरफेर कर रहा है.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में चुनाव आयोग की वेबसाइटें बंद कर दी गईं ताकि मतदाता डेटा के आधार पर सवाल ना उठ सकें. उन्होंने आयोग से 5 सीधे सवाल पूछे और कहा कि धमकाने के बजाय आयोग को इनका जवाब देना चाहिए. रैली में राहुल गांधी के इस बयान पर कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियां बजाईं.
राहुल गांधी ने अपने भाषण में चुनाव आयोग से ये पांच सवाल पूछे:-
आप भारतीय जनता को वोटर लिस्ट डिजिटल मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में क्यों नहीं दे रहे?
आप वीडियो सबूत क्यों नष्ट कर रहे हैं?
चुनाव आयोग मतदाता सूची में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा क्यों कर रहा है?
विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें धमकी क्यों दे रहा है?
चुनाव आयोग बीजेपी का एजेंट जैसा व्यवहार क्यों कर रहा है?
कांग्रेस नेता ने कर्नाटक सरकार से मांग की कि वो ‘चुनाव चोरी’ के अपराध की जांच करें और कार्रवाई करें. राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी 25 लोकसभा सीटों के अंतर से प्रधानमंत्री बने हैं. अगर हमें पूरे देश का इलेक्ट्रॉनिक वोटर डेटा मिल जाए, तो हम साबित कर देंगे कि भारत के प्रधानमंत्री चोरी से पद पर बैठे हैं.
राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 लोकसभा चुनाव में उनकी गठबंधन सरकार महाराष्ट्र में जीती, लेकिन 4 महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत चौंकाने वाली थी. जांच में पता चला कि विधानसभा चुनाव में 1 करोड़ नए वोट पड़े, जो लोकसभा में नहीं पड़े थे. उन्होंने कहा कि ये 1 करोड़ नए वोट बीजेपी को मिले. जहां भी ऐसे नए वोट पड़े, वहां बीजेपी जीती. हमारे वोट घटे नहीं, लेकिन नए वोट बीजेपी की तरफ गए.
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी को इन तथ्यों को सामने लाने में 6 महीने लगे, क्योंकि उन्हें कागजों के ढेर में से डेटा खंगालना पड़ा. राहुल गांधी ने इसे एक अपराध का सबूत बताया और जोर देकर कहा कि यह मामला लोकतंत्र की जड़ें हिला देने वाला है.
First Updated : Friday, 08 August 2025