'उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए...'राहुल गांधी ने कांशीराम की जयंती पर PM मोदी से की बड़ी मांग
आज 15 मार्च को कांशीराम की 92वीं जयंती है. इस मौके पर कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बसपा के संस्थापक को भारत रत्न देने की मांग की है.

नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती पर राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छिड़ गई है. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ी मांग की है कि कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए.
कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि कांशीराम जी ने भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव लाया. उन्होंने बहुजनों, दलितों और गरीबों में जागरूकता फैलाई. लोगों को बताया कि उनका वोट उनकी ताकत है और देश सबका बराबर है. उनके प्रयासों से बहुत से लोग, जो पहले राजनीति से दूर थे, अब इसे न्याय और समानता का जरिया मानते हैं.
राहुल गांधी ने पत्र में लिखा कि संविधान सबको समानता, सम्मान और हिस्सेदारी का वादा करता है. कांशीराम जी ने जीवन भर समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए इन वादों को सच करने की कोशिश की. इससे लोकतंत्र मजबूत हुआ और राजनीति अधिक समावेशी बनी.
Lok Sabha LoP Rahul Gandhi writes to Prime Minister Narendra Modi, requesting that BSP Founder Kanshi Ram be awarded the Bharat Ratna posthumously. pic.twitter.com/ChGo40ZugK
— ANI (@ANI) March 15, 2026
लखनऊ कार्यक्रम में भी उठी मांग
राहुल गांधी ने बताया कि कई सालों से दलित बुद्धिजीवी, नेता और कार्यकर्ता यह मांग कर रहे हैं. हाल ही में लखनऊ में एक कार्यक्रम में भी इस मांग को जोर-शोर से उठाया गया. वहां मौजूद लोगों ने इसे जनता की भावना बताया.
राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम को भारत रत्न देना उनके योगदान को सही सम्मान देगा. यह उन करोड़ों लोगों की आशा का सम्मान होगा जो उन्हें सशक्तिकरण का प्रतीक मानते हैं.
बसपा सुप्रीमो मायावती का श्रद्धांजलि
कांशीराम की जयंती पर बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ में उनकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी. यह मौका उनके विचारों को याद करने और समाज में समानता की लड़ाई को आगे बढ़ाने का है.
राहुल गांधी की यह मांग दलित और पिछड़े वर्ग के बीच राजनीतिक जागरूकता को फिर से उजागर करती है. कांशीराम जी के योगदान को राष्ट्र स्तर पर मान्यता मिले, यह कई लोगों की लंबे समय से इच्छा रही है. सरकार इस पर क्या फैसला लेती है, यह देखना बाकी है.


