राजा रघुवंशी केस में बड़ा अपडेट... दस्तावेजों की चूक बनी सोनम की जमानत की वजह, ‘गलत धारा’ ने बदल दिया पूरा खेल

मेघालय हनीमून मर्डर केस में आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई है. अदालत ने गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में खामियों को गंभीर मानते हुए राहत दी, जिससे मामले ने नया और अहम मोड़ ले लिया है.

Shraddha Mishra

मेघालय के चर्चित हनीमून मर्डर केस में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है. अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोपों का सामना कर रहीं सोनम रघुवंशी को आखिरकार जमानत मिल गई है. खास बात यह है कि इससे पहले उनकी जमानत याचिका तीन बार खारिज हो चुकी थी. इस बार अदालत का फैसला कई लोगों के लिए हैरान करने वाला रहा, क्योंकि यह राहत एक कथित कानूनी या लिपिकीय गलती के चलते मिली बताई जा रही है.

इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यह रहा कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर त्रुटियां पाई गईं. हत्या जैसे गंभीर अपराध के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 के तहत मामला दर्ज किया गया था. लेकिन जब सोनम को गिरफ्तारी के कारण बताए गए, तो उसमें धारा 403(1) का उल्लेख किया गया, जो कि इस कानून में मौजूद ही नहीं है. अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया और कहा कि किसी भी आरोपी को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि उसे किस अपराध में गिरफ्तार किया गया है. जब दस्तावेजों में ही सही धारा का जिक्र नहीं है, तो यह आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा.

अदालत ने उठाए जांच प्रक्रिया पर सवाल

पूर्वी खासी हिल्स जिला अदालत ने जांच से जुड़े कई दस्तावेजों की जांच की. इनमें गिरफ्तारी मेमो, केस डायरी, और अन्य रिकॉर्ड शामिल थे. कोर्ट ने पाया कि इन सभी दस्तावेजों में कहीं भी हत्या से जुड़ी सही धारा का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था. अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ ‘टाइपिंग मिस्टेक’ कहकर इतनी बड़ी गलती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यदि हर दस्तावेज में वही गलती दोहराई गई है, तो यह जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है. इसके अलावा, तैयार किए गए फॉर्म में जरूरी जगहों पर निशान भी नहीं लगाए गए थे, जिससे यह स्पष्ट ही नहीं हो पा रहा था कि आरोपी पर कौन-कौन से आरोप लगाए गए हैं.

कानूनी सहायता न मिलना भी बना मुद्दा

अदालत ने यह भी गौर किया कि जब सोनम को पहली बार अदालत में पेश किया गया था, तब उनके साथ कोई वकील मौजूद नहीं था. यह एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा, क्योंकि उस समय इस तरह की कानूनी त्रुटियों पर आपत्ति उठाई जा सकती थी. कोर्ट ने इस आधार पर यह मानने से इनकार कर दिया कि आरोपी ने अपने अधिकारों को छोड़ दिया था. इस तरह, कानूनी प्रतिनिधित्व की कमी भी जमानत के फैसले में एक अहम कारण बनी.

जमानत के साथ लगी सख्त शर्तें

हालांकि सोनम को जमानत मिल गई है, लेकिन इसके साथ चार कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं. अदालत ने स्पष्ट किया है कि:

  • वह फरार नहीं होंगी और किसी भी सबूत या गवाह को प्रभावित नहीं करेंगी.
  • हर सुनवाई की तारीख पर अदालत में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा.
  • बिना अनुमति के न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगी.
  • उन्हें 50,000 रुपये का निजी मुचलका और समान राशि के दो जमानती देने होंगे.

इन शर्तों के साथ अदालत ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो.

क्या है पूरा हनीमून मर्डर मामला

यह मामला 2025 का है, जब इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी ने 11 मई को सोनम से शादी की थी. शादी के कुछ दिनों बाद, 20 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय पहुंचे. लेकिन जल्द ही दोनों के लापता होने की खबर सामने आई, जिसके बाद बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. कई एजेंसियों और स्थानीय लोगों की मदद से चलाए गए अभियान के बाद 2 जून को राजा का शव बरामद हुआ. इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था.

साजिश का खुलासा

जांच के दौरान सामने आया कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी. योजना के तहत, हनीमून के दौरान ही राजा को रास्ते से हटाने का फैसला लिया गया था. बताया गया कि वेई सावदोंग जलप्रपात के पास तीन भाड़े के लोगों ने राजा पर हमला किया. धारदार हथियारों से हमला करने के बाद शव को खाई में फेंक दिया गया और इसे हादसा दिखाने की कोशिश की गई.

हत्या के कुछ दिनों बाद, 9 जून को सोनम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक ढाबे पर पहुंची, जहां से उसे हिरासत में लिया गया. इसके बाद राज कुशवाहा और अन्य तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल सभी सह-आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की सुनवाई जारी है.

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