मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह मामले में बढ़ी जांच, 7 दिन में होगी जमीन की पैमाइश

मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह मामले में प्रशासन ने प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद भूमि रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल कराने का फैसला किया है. पटवारी और गिरदावर की टीम सात दिन में पैमाइश कर रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर 30 जून के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

जैसलमेर: सीमावर्ती इलाके में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन’ अभियान के तहत चर्चित मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह से जुड़े मामले में मंगलवार को उपनिवेशन तहसील कार्यालय में अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान दरगाह प्रबंधन समिति की ओर से भूमि और संरचना से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों के साथ न्यायालय के आदेश भी प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए गए. दस्तावेजों के अवलोकन के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की गहन जांच कराने का फैसला लिया है.

उपनिवेशन तहसीलदार रामगढ़-द्वितीय ने क्या निर्देश दिए? 

उपनिवेशन तहसीलदार रामगढ़-द्वितीय ज्ञान सिंह भाटी ने संबंधित हल्का पटवारी को भूमि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए सात दिन की समय-सीमा तय की गई है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और निर्णय लिया जाएगा.

रामगढ़-तनोट बाईपास मार्ग पर स्थित मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह को लेकर दावा किया जाता है कि यह लगभग 250 वर्ष पुरानी धार्मिक स्थल है. हाल ही में ‘0 से 50 किलोमीटर बॉर्डर क्लीन अभियान’ के तहत प्रशासन ने दरगाह प्रबंधन को नोटिस जारी कर भूमि स्वामित्व और निर्माण से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा था. नोटिस में 22 जून तक जवाब देने की समय-सीमा निर्धारित की गई थी. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 23 जून से नियमानुसार कार्रवाई शुरू की जा सकती है.

सुनवाई के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखा. उनका कहना था कि विवादित दरगाह वैध कब्रिस्तान क्षेत्र की सीमा के भीतर स्थित है और लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है. प्रतिनिधियों ने यह भी तर्क दिया कि किसी धार्मिक संरचना को हटाने या उसके संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार उपनिवेशन तहसीलदार के बजाय जिला कलेक्टर के पास है. उन्होंने प्रशासन से ऐतिहासिक तथ्यों और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष निर्णय लेने की मांग की.

तहसीलदार ज्ञान सिंह भाटी ने बताया कि दरगाह के आसपास कब्रिस्तान होने की जानकारी सामने आई है, लेकिन यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित संरचना वास्तव में कब्रिस्तान की सीमा के भीतर आती है या बाहर. इसी उद्देश्य से पटवारी और गिरदावर की टीम मौके पर जाकर पैमाइश करेगी तथा भूमि की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी.

प्रशासन का क्या कहना है?

प्रशासन का कहना है कि 30 जून तक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी. इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड, उपलब्ध दस्तावेजों और मौके की स्थिति के आधार पर नियमानुसार अंतिम फैसला लिया जाएगा. सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर अब स्थानीय लोगों और प्रशासन की निगाहें आगामी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं.

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