राज्य सभा चुनाव में वोट का खेल! क्या राहुल गांधी की करीबी का खेल बिगड़ जाएगा ?

राज्य सभा चुनाव होने वाला है ऐसे में अब देश के दो बड़े पार्टी कांग्रेस और बीजेपी की पूरी नजर इस पर है। जिनकी किस्मत दांव पर लगी है उनके अंदर बेचैनी है तो वहीं जिस पार्टी के वो उम्मीदवार है वो पार्टी पूरी तरह से अपनी ताकत झोंकने में लगी है क्योंकि डर इस बात का सता रहा है कि कहीं क्रॉस वोटिंग उनका खेल न बिगाड़ दे।

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली : राज्य सभा चुनाव में सबकी नजर मध्य प्रदेश पर टिकी है। मध्य प्रदेश की तीन राज्य सभी सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में उतर गए हैं। बीजेपी ने तीन प्रत्याशी उतारा है तो कांग्रेस से राहुल गांधी की करीबी मिनाक्षी नटराजन चुनाव लड़ रही हैं। बीजेपी के तीसरे कैंडिडेट उतरने से राज्य सभा चुनाव का मुकाबला अब दिलचस्प हो गया है, इतना ही नहीं अब क्रॉस वोटिंग का खतरा भी मंडराने लगा है। इन सीटों पर शह-मात का खेल शुरू हो गया है। विधायकों की संख्या के लिहाज से दो बीजेपी और एक  सीट कांग्रेस के लिए पक्की मानी जा रही थी लेकिन बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट को उतारकर राहुल गांधई की करीबी मिनाक्षी नटराजन की सियासी टेंशन को बढ़ा दी है। बीजेपी ने तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को भी मैदान में उतारा है। इन सभी के नाम के ऐलान के बाद निर्विरोध चुनाव की संभावना खत्म हो गई है और वोट के जरिए फैसला होगा। ऐसे अब असल पेंच विधायकों की क्रॉस वोटिंग को लेकर फंसता दिख रहा है। 

राज्य सभा चुनाव में नंबर गेम क्या है ?

मध्य प्रदेश में विधानसभा में सदस्यों की संख्या 230 है लेकिन फिलहाल 228 सदस्य हैं, इनमें बीजेपी के 164 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। राज्य सभा चुनाव की एक राज्य सभा सीट पर दर्ज करने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 58 विधायकों ( प्रथम वरीयता के वोट) के समर्थन चाहिए। विधायकों के आधार पर बीजेपी की दो सीटें कन्फर्म है और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है, लेकिन बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के उतरने के बाद मामला उलझ गया है। बीजेपी के 164 विधायकों के आधार पर दो राज्य सभा सीट जीतने के लिए 116 विधायकों के वोट चाहिए। बीजेपी को दो सीटें जीतने के बाद 48 अतिरिक्ट वोट चाहिए, जबकि कांग्रेस 64 विधायकों के दम पर एक सीट जीत सकती है, उसके बाद भी उसके 6 विधायकों का अतरिक्त वोट हो रहा है लेकिन मामला बीजेपी के तीसरे प्रत्याशी के उतरने से है। 

तीसरी राज्य सभा सीट के लिए जबरदस्त मुकाबला 

विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी 2 राज्यसभा सीटें सेफ करने के बाद 48 विधायक बेचेंगे, जिसके तीसरी राज्य सभा की सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोटों की जरुरत होगी। वहीं कांग्रेस के पास एक राज्य सभा सीट जीतने के लिए जरुरी संख्या बल है लेकिन बीजेपी के द्वारा तीसरे उम्मीदवार की घोषणा ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और मिनाक्षी नटराजन की जीत की राह मुश्किल कर दी है। बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतारने के फैसले ने कांग्रेस की बेचैनी और धड़कने बढ़ा दी है। बीजेपी का यह कदम बताता है कि पार्टी या तो अपनी पार्टी से बाहर के विधायकों का समर्थन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है ये उसे लगता है कि क्रॉस वोटिंग अंतिम नतीजे को बदल सकती है। कांग्रेस के लिए यह अपनी पार्टी को एकजुट रखने और उस सीट को बचाने की क्षमता का इम्तिहान है, जो मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से उसकी पहुंच में दिख रही है। 

कांग्रेस की टेंशन क्यों बढ़ी ?

कांग्रेस के पास वैसे तो 64 विधायक हैं लेकिन विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को चुनाव हलफनामे के मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने के चलते सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सभा चुनाव में वोट डालने से रोक दिया है। वहीं बीना से विधायक निर्मला सप्रे लोक सभा चुनाव से पहले अनौपचारिक रुप से बीजेपी में शामिल हो गई थी और उनकी अयोग्यता का मामला फंसा है। दतिया के राजेन्द्र भआरती को पहली ही अयोग्य घोषित किया चुका है। ऐसे में कांग्रेस के पास 62 वैध वोट बचे हैं। आंकड़े के लिहाज से कांग्रेस एक सीट आसानी से जीत सकती है लेकिन बगावत के चलते क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है और एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है। मिनाक्षी नटराजन के मैदान में उतारे जाने से पार्टी में असंतोष भी दिख रहा है ऐसे में क्रॉस वोटिंग का डर कांग्रेस को सता रहा है।  


 

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