'आज भी फोन-इंटरनेट से दूर...', अजीत डोभाल ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में किया चौंकाने वाला खुलासा
अजीत डोभाल भारत के पांचवें और सबसे मशहूर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. 1945 में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं. उनके जीवन की कई रोमांचक और हैरतअंगेज हैं कि वे किसी जासूसी फिल्म की पटकथा को भी पीछे छोड़ दें.

नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में जहां हर काम मोबाइल फोन और इंटरनेट पर निर्भर होता जा रहा है, वहीं भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपनी जीवनशैली को लेकर सभी को हैरान कर दिया है. दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र में उन्होंने खुलासा किया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते.
युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने संवाद और धैर्य की अहमियत पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि आज के दौर में भले ही टेक्नोलॉजी जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी हो, लेकिन संवाद के दूसरे प्रभावी माध्यम भी मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल बहुत कम लोग जानते हैं.
फोन और इंटरनेट ही संवाद का एकमात्र जरिया नहीं...
एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं. संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए.
उन्होंने युवाओं को यह भी समझाया कि संदेश हमेशा ईमानदारी से दिया जाना चाहिए, न कि किसी प्रोपेगेंडा के जरिए. उनके मुताबिक, सही संवाद वही है जो सच्चाई और भरोसे पर टिका हो.
कौन हैं अजीत डोभाल?
अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं. वे भारत के इतिहास में ‘कीर्ति चक्र’ पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी भी रह चुके हैं.
उनकी रणनीतिक भूमिका सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में अहम रही है. इसके अलावा डोकलाम विवाद के समाधान और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद के खिलाफ सख्त नीति अपनाने में भी उनका बड़ा योगदान माना जाता है.
पाकिस्तान में 7 साल अंडरकवर मिशन
अजीत डोभाल का करियर कई साहसिक अभियानों से भरा रहा है. कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के तौर पर 7 साल बिताए और चरमपंथी संगठनों से जुड़ी अहम खुफिया जानकारियां जुटाईं. इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में भी 6 साल तक सेवाएं दीं.
1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाने में भूमिका निभाई. 1999 के कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में शामिल थे. मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ जमीनी स्तर पर उनकी सक्रिय भूमिका भी रही है.
युवाओं को दिया देशभक्ति का संदेश
कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि भारत ने आजादी के लिए भारी कीमत चुकाई है. कई पीढ़ियों ने इसके लिए कष्ट और बलिदान झेले हैं. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारत के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें.


