बांग्लादेश: 'अगर मकर संक्रांति मनाई तो...', जमात-ए-इस्लामी की धमकी से सहमे बांग्लादेशी हिंदू
बांग्लादेश में चुनाव नजदीक आते ही हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और धमकियां बढ़ गई हैं. जमात-ए-इस्लामी ने शक्रेन के सार्वजनिक आयोजनों पर चेतावनी दी है, जिससे अल्पसंख्यकों में डर का माहौल बन गया है.

बांग्लादेश में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. लगातार हो रहे हमलों और धमकियों ने देश में डर का माहौल पैदा कर दिया है. इन घटनाओं के बीच मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि हालात को काबू में लाने के ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे.
इस बीच एक नया और चिंताजनक मामला सामने आया है. कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं के प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति, जिसे बांग्लादेश में शक्रेन कहा जाता है, को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है. संगठन ने कहा है कि त्योहार के दौरान पतंग उड़ाने, संगीत बजाने या किसी भी तरह के सार्वजनिक आयोजन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस चेतावनी के बाद आशंका जताई जा रही हैं कि त्योहार के दौरान हिंसा भड़क सकती है.
खुले तौर पर दी जा रही धमकियां
जमात-ए-इस्लामी के नेताओं ने सोशल मीडिया और स्थानीय घोषणाओं के जरिए हिंदू समुदाय को चेताया है कि वे ऐसे किसी भी कार्य से बचें, जिसे संगठन “इस्लामी मूल्यों के खिलाफ” मानता है. साफ कहा गया है कि अगर शक्रेन के दौरान खुले तौर पर उत्सव मनाया गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे बड़े शहरों में रहने वाले हिंदू परिवारों में डर साफ दिखाई दे रहा है. कई परिवारों ने इस बार सार्वजनिक रूप से त्योहार न मनाने और घर के भीतर ही सीमित तरीके से पूजा और परंपराएं निभाने का फैसला किया है.
शक्रेन: एक पुरानी सांस्कृतिक परंपरा
शक्रेन या मकर संक्रांति बांग्लादेश में सदियों से मनाया जाने वाला पारंपरिक त्योहार है. हर साल 14 जनवरी को लोग पतंग उड़ाते हैं, तिल और गुड़ से बने पकवान खाते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. यह त्योहार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा रहा है. हालांकि बीते कुछ वर्षों से कट्टरपंथी समूह इस त्योहार को गैर-इस्लामी बताकर इसका विरोध कर रहे हैं. पिछले साल भी शक्रेन के दौरान कुछ इलाकों में झड़पों और हमलों की खबरें सामने आई थीं, जिससे तनाव और बढ़ गया था.
हिंसा के आंकड़े डराने वाले
पिछले साल दिसंबर 2025 में एक छात्र नेता की हत्या के बाद हालात और खराब हो गए. इसके बाद देश के कई हिस्सों से हिंदुओं पर हमले, लूटपाट और हत्याओं की खबरें सामने आईं. कुछ मामलों में लोगों को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार दिया गया, जिससे समुदाय में गहरी दहशत फैल गई.
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, केवल दिसंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा की 50 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें हत्याएं, आगजनी, चोरी, झूठे आरोपों में गिरफ्तारी, शारीरिक हमले और महिलाओं के खिलाफ अपराध शामिल हैं. कई जगहों पर मंदिरों, घरों और दुकानों को भी नुकसान पहुंचाया गया.


