ईरान में खामेनेई करेंगे अब मौत का तांडव! जनता को बताया अल्लाह का दुश्मन, जारी किया मौत का फरमान

ईरान में 2 सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी है. अब तक 72 लोगों की मौत हुई है और 2300 गिरफ्तारियां भी. इस दौरान खामेनेई ने चेतावनी दी है कि 'ईश्वर के शत्रु' को मृत्युदंड मिलेगा.

Sonee Srivastav

ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार को इन प्रदर्शनों को 14 दिन पूरे हो गए, लेकिन सरकार की सख्त कार्रवाई के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे है. इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने से दुनिया को सही जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है.

मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, कम से कम 72 लोग मारे जा चुके हैं और 2,300 से ज्यादा को गिरफ्तार किया गया है. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को 'ईश्वर का दुश्मन' माना जाएगा, जिसकी सजा मौत हो सकती है. 

 खामेनेई ने विदेशों पर लगाया आरोप 

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने शनिवार को सरकारी टीवी पर बयान दिया कि विरोध में शामिल लोगों को 'ईश्वर के शत्रु' के रूप में देखा जाएगा. यह आरोप मौत की सजा के साथ जुड़ा है. उन्होंने कहा कि दंगाइयों की मदद करने वालों को भी सजा मिलेगी.

अभियोजकों को बिना दया के मुकदमे चलाने के आदेश दिए गए हैं. खामेनेई ने विदेशी ताकतों पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शन देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे है. सरकारी मीडिया में प्रदर्शनकारियों को 'आतंकवादी' बताया जा रहा है.

मौतों और गिरफ्तारियों का सिलसिला

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक 72 मौतें हो चुकी है. सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाई और कई जगहों पर आगजनी की. सरकारी रिपोर्ट्स में सुरक्षा अधिकारियों की मौतों का जिक्र है, जैसे गचसरन में तीन बासिज सदस्यों की हत्या.

तसनीम न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि 200 'आतंकवादी' गिरफ्तार किए गए, जिनके पास हथियार मिले. तेहरान, इस्फहान और मशहद जैसे शहरों में रात भर प्रदर्शन जारी रहे. वीडियो में लोग 'खामेनेई मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे है.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया. उन्होंने कहा, "ईरान आजादी की ओर बढ़ रहा है, अमेरिका मदद को तैयार है." अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी कि ट्रंप के वादों को हल्के में न लें.

वहीं, ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने लोगों से सप्ताहांत में सड़कों पर उतरने की अपील की. कई एयरलाइंस ने ईरान की उड़ानें रद्द कर दी, जैसे ऑस्ट्रियन और टर्किश एयरलाइंस. अल जजीरा जैसे मीडिया को ही ईरान से रिपोर्टिंग की इजाजत मिली है.

प्रदर्शनों का कारण

प्रदर्शन 28 दिसंबर को रियाल मुद्रा की गिरावट के खिलाफ शुरू हुए, लेकिन जल्दी ही सरकार विरोधी हो गए. ये अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंधों का असर है. सरकारी टीवी में सरकार समर्थक रैलियां दिखाई जा रही है, लेकिन वीडियो से विरोध की तस्वीर साफ है. स्कूल ऑनलाइन चल रहे है. 

नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी के बेटे ने कहा कि इंटरनेट बंदी से सुरक्षा बलों को दमन का मौका मिल रहा है. प्रदर्शनकारी आजादी की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की सख्ती से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.
 

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