'700 लोगों ने किया बलात्कार' UK संसद में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग पर हंगामा, MP ने पढ़े पीड़िताओं के बयान
ब्रिटेन के सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में एक भावुक भाषण देकर ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल पर फिर से बहस छेड़ दी है। उन्होंने दो हफ्ते की स्वतंत्र सुनवाई के दौरान सामने आए पीड़िताओं के बयान पढ़े।

नई दिल्ली: ब्रिटेन के सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में एक भावुक भाषण देकर ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल पर फिर से बहस छेड़ दी है। उन्होंने दो हफ्ते की स्वतंत्र सुनवाई के दौरान सामने आए पीड़िताओं के बयान पढ़े। लोव ने कहा कि दुनिया को सुनना चाहिए कि सुनवाई में क्या सामने आया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि बहादुर सर्वाइवर्स की बात सुनें और अब कार्रवाई करें।
सिस्टम की नाकामी पर उठाए सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लोव ने अपने भाषण में बताया कि कैसे बड़े पैमाने पर यौन शोषण, हिंसा और धमकियां दी गईं। उन्होंने कहा कि नस्ल के आधार पर लड़कियों को निशाना बनाया गया। पुलिस पर भी गलत काम के आरोप लगे। लोव का दावा है कि सरकारी अधिकारी, हेल्थ वर्कर और चिल्ड्रन होम के स्टाफ बार-बार कमजोर बच्चों को बचाने में नाकाम रहे।
85 इलाकों में फैला था नेटवर्क
ये बयान बच्चों के ग्रुप-बेस्ड यौन शोषण की एक स्वतंत्र जांच के दौरान दर्ज किए गए। पिछले साल लोव की अगुवाई में हुई निजी जांच में ब्रिटेन के कम से कम 85 इलाकों में ऐसे गैंग का पता चला था। अगस्त में जारी बयान में कहा गया कि ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के पुरुषों के ये गैंग दशकों से सक्रिय थे। इनका दायरा पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा था। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तानी पुरुषों का पैटर्न और सरकारी संस्थाओं की बड़ी लापरवाही साफ दिखती है।
पीड़िताओं ने सुनाई दर्दभरी दास्तां
लोव ने संसद में कई पीड़िताओं के बयान पढ़े। एक सर्वाइवर ने बताया कि 13 साल की उम्र से तीन साल तक सैकड़ों लोगों ने उसका शोषण किया। कई बयानों में धर्म और नस्ल के आधार पर भेदभाव की बात सामने आई। एक पीड़िता ने कहा कि अपराधी ईसाई लड़कियों को कम नैतिक मूल्यों वाली बताकर शोषण को सही ठहराते थे। वहीं मुस्लिम लड़कियों को ऊंचे मूल्यों वाली बताया जाता था।
पुलिस और अस्पताल पर भी आरोप
कुछ पीड़िताओं ने पुलिस अधिकारियों पर भी शोषण के आरोप लगाए। एक बयान में कहा गया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पुलिसवालों ने रेप किया। एक अन्य सर्वाइवर ने बताया कि 15 साल की उम्र में अस्पताल गई तो स्टाफ ने कोई सवाल नहीं पूछा। सिर्फ दवा देकर भेज दिया। एक गवाह ने कहा कि ईद और छुट्टियों के दौरान शोषण बढ़ जाता था। पार्टियां बड़ी और ज्यादा हिंसक हो जाती थीं।
पिंजरों में बंद करने का आरोप
लोव ने एक महिला का बयान भी पढ़ा जिसने 15 से 20 लड़कियों को पिंजरों में बंद देखा था। एक अन्य पीड़िता ने बताया कि उसके साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया गया। लोव ने कहा कि एक सर्वाइवर ने अपील की कि यह सब रुकना चाहिए। किसी और बच्चे के साथ ऐसा न हो। लोग डरना बंद करें और सच में कुछ करें।


