अंबाला: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर एक नया इतिहास रच दिया. हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से भरी गई इस उड़ान ने न केवल वायुसेना के शौर्य और तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित किया, बल्कि देशभर में गर्व और खुशी की लहर दौड़ा दी. देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी राष्ट्रपति मुर्मू, तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर भी हैं, और उनका यह अनुभव भारतीय वायुसेना की आधुनिकता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है.
यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय वायुसेना के किसी फाइटर जेट में उड़ान भरी हो. इससे पहले, उन्होंने 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी. उस ऐतिहासिक पल के बाद उन्होंने वायुसेना के पायलटों की सराहना करते हुए कहा था कि 'वायुसेना के पायलटों की दक्षता और अनुशासन की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है.'
राफेल उड़ान से पहले राष्ट्रपति मुर्मू के स्वागत में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया. इस अवसर पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने राष्ट्रपति का स्वागत किया और वायुसेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया. राफेल में राष्ट्रपति की यह उड़ान भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है.
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन भारत की वायु सुरक्षा का रणनीतिक केंद्र माना जाता है. यहीं पर राफेल स्क्वाड्रन की तैनाती की गई है. फ्रांस निर्मित यह मल्टीरोल फाइटर जेट अपनी गति, सटीकता और घातक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है. राफेल को भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाला सबसे आधुनिक हथियार माना जाता है, और अब राष्ट्रपति मुर्मू की उड़ान ने इसे और भी गौरवान्वित कर दिया है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राफेल उड़ान अनुभव भारतीय वायुसेना की साहसिक परंपरा, तकनीकी उत्कृष्टता और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण के प्रति समर्पण को दर्शाता है. यह क्षण न केवल भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि राष्ट्र की सर्वोच्च पदाधिकारी देश की रक्षा तैयारियों को नजदीक से समझने और अनुभव करने में भी आगे हैं.
First Updated : Wednesday, 29 October 2025