आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, खतरनाक कुत्तों पर फोकस करने की छिड़ी बात

आज 7 जनवरी को आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के समर्थकों और विरोधियों दोनों की बात सुनी जा रही है.

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नई दिल्ली: देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और इससे जुड़ी समस्याओं पर सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से विचार कर रहा है. यह मामला जनता की सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने का है. कोर्ट ने कई बार निर्देश दिए हैं कि सड़कें सुरक्षित रहनी चाहिए और कुत्तों को मानवीय तरीके से हैंडल किया जाए. सुनवाई अभी भी चल रही है और विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं.

कोर्ट का रुख: नियम सख्ती से पालन होने चाहिए 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर सड़कें लोगों के लिए खाली और सुरक्षित होनी चाहिए. कुत्तों को मारने की बात नहीं, बल्कि उन्हें आश्रय गृहों में शिफ्ट करने पर जोर दिया गया है. अदालत का मानना है कि नगर निगमों को पशु जन्म नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए. 

इससे नसबंदी और टीकाकरण के जरिए कुत्तों की संख्या धीरे-धीरे कम हो सकती है. कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि सिर्फ काटने की घटनाएं ही नहीं, बल्कि साइकिल या बाइक सवारों का पीछा करने से भी दुर्घटनाएं हो सकती है. 

खतरनाक कुत्तों पर फोकस

वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने कोर्ट में तर्क दिया कि सभी आवारा कुत्तों को एक साथ पकड़ना सही नहीं है. खतरनाक कुत्तों की पहचान कर उनसे निपटा जा सकता है, लेकिन अंधाधुंध कार्रवाई से बचना चाहिए. उन्होंने मानवीय और लक्षित तरीके से समस्या सुलझाने की मांग की. सिबल ने देश में इंसान और जानवरों के बीच संघर्ष के अन्य उदाहरण भी दिए, जैसे हाथियों से जुड़ी घटनाएं, और कहा कि इसके लिए व्यापक नीति की जरूरत है.

तकनीकी समाधान की छिड़ी बात 

सुनवाई में कोर्ट ने रेलवे के उदाहरण का हवाला दिया, जहां पटरियों पर जानवरों की मौत रोकने के लिए इन्फ्रारेड सिस्टम इस्तेमाल हो रहा है. अदालत ने सोचा कि ऐसी तकनीक अन्य जगहों पर भी कुत्तों या जानवरों से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकती है. हाईवे पर आवारा जानवरों की वजह से दुर्घटनाओं पर भी चिंता जताई गई और राजस्थान हाईकोर्ट के जजों की घटना का उदाहरण दिया गया. 

सुनवाई का आगे का रुख

यह मामला स्वतः संज्ञान में लिया गया है और कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं. कोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्षों यानी पशु प्रेमियों और सुरक्षा चाहने वालों की बात सुनी जाएगी. कपिल सिबल ने अन्य मामलों का हवाला देते हुए समय मांगा है. अदालत ने पूछा कि क्या सभी कुत्तों को पकड़कर रखने के खिलाफ तर्क हो रहा है. सुनवाई जारी है और कोर्ट संतुलित समाधान की दिशा में काम कर रहा है, ताकि जन सुरक्षा भी बनी रहे और पशुओं के साथ क्रूरता न हो. First Updated : Wednesday, 07 January 2026