नए युग की शुरुआत! 14 जनवरी को नए ऑफिस में शिफ्ट होगा प्रधानमंत्री कार्यालय, आजादी के बाद पहली बार साउथ ब्लॉक से बाहर होगा पीएमओ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी को सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बने ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में नए पीएमओ में स्थानांतरित होंगे. यह कदम प्रशासनिक आधुनिकीकरण, औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़ने और शासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कार्यालय अब अपने अंतिम चरण में है और संभावना है कि वह मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को वहां कार्यभार संभाल लेंगे. यह नया कार्यालय सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत विकसित किए गए अत्याधुनिक ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का हिस्सा है, जिसे देश की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.

सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम हिस्सा

‘सेवा तीर्थ’ परिसर को खासतौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के लिए डिजाइन किया गया है. इस परिसर में तीन अलग-अलग भवन बनाए गए हैं, ताकि प्रत्येक संवेदनशील विभाग स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से कार्य कर सके. नए पीएमओ भवन का नाम ‘सेवा तीर्थ-1’ रखा गया है, जबकि ‘सेवा तीर्थ-2’ में पहले ही कैबिनेट सचिवालय कार्य कर रहा है. ‘सेवा तीर्थ-3’ को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और एनएससीएस के कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है.

नए युग की शुरुआत

प्रधानमंत्री कार्यालय का दक्षिण ब्लॉक से स्थानांतरण ऐतिहासिक माना जा रहा है. आज़ादी के बाद से अब तक पीएमओ दक्षिण ब्लॉक में ही स्थित रहा, लेकिन अब यह व्यवस्था बदलने जा रही है. सरकार इसे औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़कर नए भारत की पहचान स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानती है. नया कार्यालय न केवल आधुनिक तकनीक से लैस होगा, बल्कि इसकी वास्तुकला में ‘सेवा’ और ‘कर्तव्य’ की भावना को प्रमुखता दी गई है.

संग्रहालय में बदले जाएंगे नॉर्थ और साउथ ब्लॉक

पीएमओ और अन्य कार्यालयों के स्थानांतरण के बाद नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को आम जनता के लिए खोला जाएगा. इन दोनों ऐतिहासिक इमारतों को ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित करने की योजना है. इस परियोजना के लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की एक प्रमुख संग्रहालय विकास एजेंसी के साथ तकनीकी सहयोग का समझौता भी किया गया है. यह संग्रहालय भारत की प्राचीन से आधुनिक यात्रा को दर्शाएगा.

लागत और निर्माण की जानकारी

‘सेवा तीर्थ’ परिसर, जिसे कार्यकारी एन्क्लेव भी कहा जाता है, का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो द्वारा लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है. यह परिसर करीब 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री के लिए एक नया आधिकारिक आवास भी पास ही निर्माणाधीन है, जिसे फिलहाल ‘कार्यकारी एन्क्लेव पार्ट-2’ कहा जा रहा है.

प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की कोशिश

केंद्र सरकार दिल्ली में फैले मंत्रालयों को एक जगह लाकर प्रशासनिक कामकाज को सुगम बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. इसी क्रम में नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) भवनों का निर्माण किया जा रहा है. पिछले वर्ष अगस्त में उद्घाटित ‘कर्तव्य भवन’ में कई मंत्रालय पहले ही शिफ्ट हो चुके हैं. सरकार का मानना है कि इससे नीतिगत फैसले तेजी से होंगे और शासन अधिक प्रभावी बनेगा.

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