बंगाल में गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू! CM सुवेंदु के रडार पर ममता बनर्जी के कई बड़े नेता, ED और पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद TMC नेताओं के खिलाफ ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां शुरू हो गई हैं, जिसमें पूर्व मंत्री सुजीत बोस, संदेशखाली के शेख शाहजहां, कई विधायकों के रिश्तेदार और पंचायत पदाधिकारी शामिल हैं.

Sonee Srivastav

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर शिकंजा कसता जा रहा है. राज्य में टीएमसी के कई बड़े नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है. इन पर वित्तीय घोटाला, रंगदारी, जबरन वसूली, अवैध हथियार, चुनावी हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगे हैं.

बड़े नामों पर ED और पुलिस का शिकंजा

सबसे चर्चित नाम पूर्व मंत्री सुजीत बोस का है. उन्हें ED ने नगरपालिका भर्ती घोटाले में धन शोधन के आरोप में गिरफ्तार किया है. संदेशखाली विवाद के मुख्य आरोपी निलंबित TMC नेता शेख शाहजहां भी गिरफ्तार हैं. उन पर जमीन हड़पने, महिलाओं पर अत्याचार और ED अधिकारियों पर हमले के मामले दर्ज हैं.

स्थानीय स्तर पर भी भारी धरपकड़

कार्रवाई केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है. दक्षिण 24 परगना के बिश्नुपुर से TMC विधायक दिलीप मंडल के बेटे अर्घ्य मंडल को STF ने गिरफ्तार किया. उनके पास से विदेशी पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए हैं.

मालदा के रतुआ ब्लॉक की TMC पंचायत प्रधान स्मृतिकणा मंडल और उनके पति अनिल मंडल को 13 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में गिरफ्तार किया गया है. कूचबिहार में TMC ब्लॉक अध्यक्ष अब्दुल कादर हक को राजनीतिक हमलों और तोड़फोड़ के आरोप में पकड़ा गया. फाल्टा पंचायत के उपाध्यक्ष सैदुल खान समेत कई अन्य नेताओं को रंगदारी और हमले के मामलों में हिरासत में लिया गया है.

TMC नेता फरार 

कई TMC नेता गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं. बिश्नुपुर के विधायक दिलीप मंडल और दिनहाटा के पूर्व विधायक उदयन गुहा की पुलिस तलाश कर रही है. इन गिरफ्तारियों के बाद बंगाल के कई इलाकों में TMC के खिलाफ जनता का दबा हुआ गुस्सा सामने आ रहा है.

कई जगह पुलिस थानों के बाहर प्रदर्शन हो रहे हैं. कुछ स्थानों पर लोग TMC नेताओं से पहले ली गई रंगदारी की रकम वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में विपक्ष इस कार्रवाई को “जनता की जीत” बता रहा है, जबकि TMC इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दे रही है. बंगाल में राजनीतिक सफाई का यह सिलसिला जारी रहने के आसार हैं.

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