केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भारी बारिश के बाद लैंडस्लाइड, सुरक्षित निकाले गए हजारों श्रद्धालु

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर तेज बारिश और भूस्खलन के बाद हालात अचानक बिगड़ गए. रातभर चले राहत अभियान में प्रशासन और बचाव टीमों ने हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालकर यात्रा को दोबारा सुचारु करने की कोशिश तेज कर दी.

Shraddha Mishra

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में चल रही विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम यात्रा के बीच मंगलवार रात मौसम ने अचानक करवट ले ली. तेज बारिश के चलते सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक के पैदल यात्रा मार्ग पर कई जगह भारी मलबा और पत्थर आ गए, जिससे श्रद्धालुओं के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई. रात के अंधेरे और खराब मौसम के बावजूद प्रशासन, पुलिस और राहत टीमों ने तेजी दिखाते हुए हालात को संभाला और हजारों यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया. राहत की बात यह रही कि समय रहते कार्रवाई होने से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और बुधवार सुबह तक यात्रा मार्ग को दोबारा खोल दिया गया.

मंगलवार देर रात केदारनाथ यात्रा क्षेत्र में तेज बारिश शुरू हुई. लगातार हो रही बारिश के कारण सोनप्रयाग-गौरीकुंड पैदल मार्ग पर तीन अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन हो गया. पहाड़ियों से अचानक मलबा और पत्थर गिरने लगे, जिससे यात्रा मार्ग बाधित हो गया. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत यात्रियों की आवाजाही रोक दी ताकि किसी तरह का खतरा न हो. रात के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर मौजूद थे, इसलिए प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी लोगों को सुरक्षित निकालने की थी.

प्रशासन ने तुरंत संभाला मोर्चा

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया. जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने देर रात ही अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्थिति की लगातार निगरानी शुरू कर दी. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए. इसके बाद पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं. खराब मौसम और अंधेरे के बावजूद राहत कार्य शुरू कर दिया गया. अधिकारियों ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए लगातार अनाउंसमेंट भी कराए.

मौसम खराब होने के बावजूद राहत एजेंसियों ने पूरी रात निगरानी बनाए रखी. लगातार पहाड़ी इलाकों पर नजर रखी जा रही थी ताकि दोबारा मलबा आने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. यात्रियों को खाने-पीने और जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई गई. प्रशासन की ओर से बार-बार अपील की गई कि श्रद्धालु अफवाहों पर ध्यान न दें और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें.

30 मिनट में पैदल मार्ग फिर खोला गया

राहत टीमों ने तेजी से काम करते हुए सबसे पहले पैदल रास्ते को अस्थायी रूप से साफ किया. प्रशासनिक टीमों की मेहनत का असर यह रहा कि करीब 30 मिनट के भीतर पैदल यात्रियों के लिए रास्ता आंशिक रूप से खोल दिया गया. इसके बाद रातभर फंसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने और उन्हें ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध कराने का काम जारी रहा. कई यात्रियों को सुरक्षित शिविरों और विश्राम स्थलों तक पहुंचाया गया.

बुधवार सुबह मौसम थोड़ा साफ होने के बाद जेसीबी मशीनों की मदद से यात्रा मार्ग पर जमा भारी मलबे को पूरी तरह हटाया गया. इसके बाद सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग को दोबारा सुचारु कर दिया गया. प्रशासन ने बताया कि फिलहाल यात्रा सामान्य रूप से जारी है, लेकिन मौसम को देखते हुए लगातार निगरानी रखी जा रही है. यात्रियों से भी सावधानी बरतने और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की गई है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो