उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेनि) भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया. सख्त प्रशासन, ईमानदार छवि और अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले खंडूरी के निधन से उत्तराखंड की राजनीति में शोक की लहर है.

देहरादून: मंगलवार को उत्तराखंड की राजनीति ने एक जाने-माने चेहरे को खो दिया, जो अपनी मजबूत प्रशासन, ईमानदारी और अनुशासन के लिए जाने जाते थे. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. उनकी मौत की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई.
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी उन नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने सत्ता से ज्यादा सिद्धांतों को महत्व दिया. सेना से राजनीति तक का उनका सफर अनुशासन और पारदर्शिता की मिसाल माना जाता है. उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें एक सख्त लेकिन साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा.
सेना से राजनीति तक का सफर
एक अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी ने भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवा दी. इंजीनियरिंग कोर में अधिकारी रहते हुए उन्होंने अपनी कार्यकुशलता से अलग पहचान बनाई और वर्ष 1982 में उन्हें 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित किया गया. सेना से मेजर जनरल के पद पर रिटायर होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा.
1991 में पहली बार बने सांसद
भुवन चंद्र खंडूरी ने 1991 में गढ़वाल लोकसभा सीट से पहली बार जीत दर्ज की. इसके बाद वह कई बार सांसद चुने गए और भाजपा के प्रमुख पहाड़ी चेहरों में शामिल हो गए. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली.
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को जमीन पर उतारने और दूरदराज गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने में उनकी भूमिका को आज भी याद किया जाता है.
उत्तराखंड के 'कड़क मुख्यमंत्री' के रूप में पहचान
साल 2007 में भाजपा सरकार बनने के बाद खंडूरी पहली बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने. उनका कार्यकाल भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैये और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के लिए जाना गया. उनकी प्रशासनिक सख्ती के कारण उन्हें 'कड़क मुख्यमंत्री' कहा जाता था.
2009 लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था. हालांकि, 2011 में भाजपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया.
ईमानदारी बनी सबसे बड़ी पहचान
भुवन चंद्र खंडूरी की पहचान हमेशा एक ईमानदार और सिद्धांतवादी नेता के रूप में रही. विरोधी दलों के नेता भी उनकी व्यक्तिगत छवि पर सवाल नहीं उठा सके. बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने बाद के वर्षों में सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी.
उनके निधन के साथ उत्तराखंड ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिसकी पहचान सत्ता नहीं, बल्कि सादगी, अनुशासन और ईमानदारी थी.


