नोएडा के बाद देहरादून में फूटा श्रमिकों का गुस्सा, हड़ताल की आड़ में तोड़फोड़ और पथराव

देहरादून की फैक्ट्रियों में वेतन बढ़ोतरी और सुविधाओं की मांग को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया. पथराव और हंगामे के बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि प्रशासन ने इलाके में सख्त कदम उठाए हैं.

Shraddha Mishra

देहरादून: देहरादून के औद्योगिक इलाके में रविवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब वेतन बढ़ाने और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए. नोएडा के बाद अब उत्तराखंड में भी मजदूरों का आक्रोश खुलकर सामने आया है. ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कंपनियों के बाहर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. हालांकि प्रदर्शन के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब कुछ लोगों पर पथराव और तोड़फोड़ करने के आरोप लगे. इसके बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल खराब करने की कोशिश की. मामले में 600 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई ग्लोबल मेडिकिट लिमिटेड और लाइटेनियम टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत के बाद की गई.

प्रदर्शन के दौरान बिगड़ा माहौल

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग समूह बनाकर अलग-अलग कंपनियों और आसपास के इलाकों में जाकर कर्मचारियों को उकसा रहे थे. आरोप है कि काम पर जाने वाले श्रमिकों को रोका गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की कोशिश भी हुई. इसके बाद फैक्ट्री परिसर और पुलिस टीम पर पथराव की घटनाएं सामने आईं. थानाध्यक्ष लोकपाल परमार ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों के निवासी शामिल हैं. पुलिस का दावा है कि ये लोग प्रदर्शन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल थे.

वेतन बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर विरोध

श्रमिकों का कहना है कि वे लंबे समय से कंपनी में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सैलरी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई. रविवार सुबह करीब 250 कर्मचारी कंपनी के बाहर जमा हुए और धरने पर बैठ गए. कर्मचारियों ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और मौजूदा वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. कर्मचारी नेता दिनेश लाल ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा. उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी दूसरे राज्यों और दूरदराज के इलाकों से यहां काम करने आते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.

महिलाओं की सुरक्षा और सुविधाओं की भी मांग

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सिर्फ वेतन बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि कई अन्य मांगें भी रखीं. इनमें महिलाओं के लिए आने-जाने की बस सुविधा, फैक्ट्री परिसर में कैमरे लगाने, महिला कर्मचारियों को सप्ताह में अतिरिक्त छुट्टी देने और कैंटीन व्यवस्था सुधारने जैसी बातें शामिल थीं. कर्मचारियों का कहना था कि कई बार प्रबंधन का व्यवहार भी ठीक नहीं रहता, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है.

मजदूरों के समर्थन में उतरी कम्युनिस्ट पार्टी

इस पूरे आंदोलन को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी का भी समर्थन मिला है. पार्टी ने कहा कि श्रमिक बेहतर वेतन, ओवरटाइम भुगतान और सुरक्षित कार्यस्थल जैसी बुनियादी मांगों के लिए आवाज उठा रहे हैं और उनकी मांगें जायज हैं.

प्रशासन ने लागू की धारा 163

सेलाकुई और सिडकुल औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है. डीएम सविन बंसल के निर्देश पर यह फैसला लिया गया. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की हिंसा या अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

वार्ता के बाद कुछ मांगों पर बनी सहमति

मोहब्बेवाला स्थित विंडलास बायोटेक लिमिटेड में भी श्रमिकों ने प्रदर्शन किया. मौके पर पहुंचे श्रम विभाग और पुलिस अधिकारियों ने कर्मचारियों और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत कराई. बैठक के दौरान ओवरटाइम भुगतान, महिलाओं के लिए परिवहन सुविधा और कार्यस्थल पर सुरक्षा कैमरे बढ़ाने जैसी मांगों पर प्रबंधन ने सहमति जताई. अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए जल्द ही बाकी मुद्दों का भी समाधान निकाल लिया जाएगा.

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