पार्टनर विदेशी है तो घबराइए नहीं! अब शादी का रजिस्ट्रेशन होगा आसान, UCC में मिली खास सुविधा
UCC के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी तरह से ऑनलाइन है. अगर पार्टनर में से कोई एक विदेशी नागरिक है तो कपल का मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन भी किया जा सकता है.

उत्तराखंड: राज्य में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के तहत, मैरिज रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी तरह से ऑनलाइन है. सरकार ने अब साफ किया है कि अगर पार्टनर में से कोई एक विदेशी नागरिक है तो कपल का मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन भी किया जा सकता है. यह रजिस्ट्रेशन रजिस्ट्रार के ऑफिस में किया जा सकता है.
UCC के तहत रजिस्ट्रेशन जरूरी
राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है. इसके अनुसार मार्च 2010 के बाद हुई सभी शादियों का UCC के तहत रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है. इसके लिए एक डिटेल्ड फॉर्मेट बनाया गया है. ऑनलाइन मैरिज रजिस्ट्रेशन के दौरान एप्लिकेंट को मैरिज कार्ड, फोटो और गवाहों के बयान अपलोड करने होंगे. इसके बाद उन्हें मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है.
सरकार ने शादी को लेकर क्या कहा
अभी तक यह माना जा रहा था कि सभी शादियां सिर्फ ऑनलाइन ही रजिस्टर होंगी. यह मुद्दा हाल ही में बार एसोसिएशन और सरकार के बीच हुई मीटिंग में भी उठाया गया था. सरकार ने अब साफ किया है कि अगर मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई करने वाले लोगों में से कोई एक यानी पति या पत्नी, विदेशी नागरिक है तो कपल सीधे रजिस्ट्रार ऑफिस में अपनी शादी रजिस्टर करा सकते हैं.
कैसे होगा पूरा प्रोसेस
इसके लिए विदेशी नागरिक के पास वैलिड पासपोर्ट, वीजा, नागरिकता सर्टिफिकेट और दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट होने चाहिए. मैरिज रजिस्ट्रेशन प्रोसेस डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद ही पूरा होगा. सरकार अब रजिस्ट्रार ऑफिस में ऑफलाइन होने वाले मैरिज रजिस्ट्रेशन का सारा डेटा अलग से इकट्ठा करेगी ताकि विदेशी नागरिकों से जुड़े मैरिज रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड सिस्टमैटिक तरीके से रखा जा सके.होम सेक्रेटरी शैलेश बगौली ने कहा कि यह प्रोसेस पहले से ही लागू था. शायद सभी को इसके बारे में पता नहीं था. अब सभी को इसके बारे में बताया जा रहा है.
कांग्रेस पार्टी ने की आलोचना
इस फैसले पर पॉलिटिकल रिएक्शन भी आए हैं. कांग्रेस पार्टी ने इस कदम की आलोचना की है. कांग्रेस नेता गौरव गोगोई का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर समाज पर एक जैसा नियम थोपने की कोशिश कर रही है और इसके जरिए बांटने वाली पॉलिटिक्स को बढ़ावा दे रही है.
उनका कहना है कि UCC का इस्तेमाल सभी नागरिकों को समान अधिकार देने के बजाय एक पॉलिटिकल एजेंडा के तौर पर किया जा रहा है. कांग्रेस का यह भी कहना है कि सरकार की नीयत पर शक है क्योंकि अलग-अलग समुदायों की परंपराओं का ध्यान रखने के बजाय एक जैसा कानून थोपने की कोशिश की जा रही है. फिलहाल सरकार अपने फैसले को ऐतिहासिक और सुधार वाला बता रही है जबकि विपक्ष इसे सामाजिक संतुलन के लिए चुनौती मान रहा है.


