देहरादून-हरिद्वार के बड़े होटल ग्रुप पर सेंट्रल इंटेलीजेंस यूनिट की छापेमारी, फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी का हुआ खुलासा
देहरादून और हरिद्वार के एक बड़े होटल समूह पर राज्य कर विभाग की कार्रवाई से करोड़ों रुपये के कारोबार में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं. राज्य कर विभाग की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) को जांच के दौरान कई डिजिटल सबूत और रिकॉर्ड मिले.

उत्तराखंड: उत्तराखंड में जीएसटी चोरी के खिलाफ राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून और हरिद्वार के नामी सितारा होटल समूह पर एक साथ छापेमारी की. इस कार्रवाई से होटल कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया. जांच के दौरान अधिकारियों को करोड़ों रुपये के कारोबार में गड़बड़ी और फर्जी खरीद के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने के संकेत मिले हैं. विभाग का कहना है कि मामले में अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं.
राज्य कर विभाग की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) को काफी समय से सितारा होटल समूह के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं. सूचना थी कि होटल समूह कुछ फर्जी फर्मों के जरिए कागजों में खरीद दिखाकर गलत तरीके से टैक्स लाभ ले रहा है. इसी आधार पर विभाग ने विशेष रणनीति बनाकर अलग-अलग टीमें तैयार कीं. इसके बाद देहरादून और हरिद्वार स्थित होटल प्रतिष्ठानों और संबंधित दफ्तरों में एक साथ जांच अभियान चलाया गया. अचानक हुई इस कार्रवाई से होटल प्रबंधन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. अधिकारियों ने घंटों तक दस्तावेजों की जांच की और कई रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए.
फर्जी खरीद दिखाकर लिया गया आईटीसी
जांच में सामने आया कि होटल समूह ने बिना वास्तविक सामान खरीदे कुछ फर्मों से खरीद दिखाई थी. इसका मकसद गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना बताया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार इस तरह की गतिविधियों से सरकार को टैक्स के रूप में भारी नुकसान पहुंचाया गया. विभाग का मानना है कि होटल समूह ने न केवल खुद फायदा उठाया बल्कि उससे जुड़ी अन्य कंपनियों को भी लाभ पहुंचाने की कोशिश की.
प्रारंभिक जांच में करीब चार करोड़ रुपये के कारोबार में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं. जांच टीम ने मौके से कारोबारी दस्तावेज, बिल, डिजिटल रिकॉर्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं. इन डिवाइसों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क और लेनदेन की सही जानकारी सामने आ सके. अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य जांच में अहम भूमिका निभाएंगे.
मौके पर जमा कराए गए 1.72 करोड़ रुपये
विभाग के पास कर चोरी से जुड़े पर्याप्त प्रमाण मिलने के बाद संबंधित फर्मों ने मौके पर ही 1.72 करोड़ रुपये जमा करा दिए. हालांकि अधिकारियों ने साफ किया कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है और जांच पूरी होने के बाद कर चोरी की रकम और बढ़ सकती है. राज्य कर विभाग पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है. विभाग का मानना है कि आने वाले समय में और भी वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं.
बड़ी टीम ने संभाली जांच की जिम्मेदारी
इस पूरे अभियान में विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे. जांच टीम में उपायुक्त विनय पांडे, निखिलेश श्रीवास्तव, योगेश मिश्रा, अर्जुन सिंह राणा सहित कई अधिकारी और निरीक्षक मौजूद रहे. अधिकारियों ने कहा कि टैक्स चोरी के मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. विभाग का उद्देश्य सरकारी राजस्व की रक्षा करना और फर्जी लेनदेन पर रोक लगाना है.


