बंगाल में हार के बाद TMC में भूचाल! सांसद काकोली घोष ने दिया इस्तीफा, ममता को बड़ा झटका

कभी ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाने वाली टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बुधवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर सियासी हलचल बढ़ा दी. बंगाल में हार के बाद इसे ममता बनर्जी के लिए एक और बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

कोलकता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं. इसी बीच बुधवार को पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उनकी करीबी मानी जाने वाली वरिष्ठ टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया.

काकोली घोष लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी रही हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती रही है. उनके इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और पार्टी के अंदर असंतोष की चर्चाएं फिर से जोर पकड़ने लगी हैं.

चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी नाराजगी

काकोली घोष करीब 9 से 10 महीने तक लोकसभा में टीएमसी की चीफ व्हिप रहीं. हालांकि हाल ही में उन्हें इस जिम्मेदारी से हटाकर उनकी जगह कल्याण बनर्जी को यह पद सौंप दिया गया था. इसके बाद से ही उनके नाराज होने की खबरें सामने आने लगी थीं. काकोली घोष ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा था, 1976 से जुड़ाव, 1984 में सफर शुरू हुआ. आज मुझे चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है. उनकी इस पोस्ट के बाद से ही यह अटकलें तेज हो गई थीं कि वह जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकती हैं.

सुरक्षा बढ़ने के बाद बढ़ीं राजनीतिक चर्चाएं

इसी बीच केंद्र सरकार ने काकोली घोष की सुरक्षा बढ़ाकर वाई कैटेगरी कर दी थी. वहीं बंगाल चुनाव में हार के बाद अभिषेक बनर्जीसमेत कई नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई थी. इस फैसले के बाद भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं. बताया जा रहा है कि काकोली घोष मंगलवार को छह अन्य विधायकों के साथ कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में भी शामिल हुई थीं. इस बैठक की अगुवाई पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने की थी.

और किसने पद से भी दिया इस्तीफा

काकोली घोष ने दो दिन पहले ही टीएमसी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था. अपने इस्तीफे के पत्र में उन्होंने आईपैक को लेकर भी सवाल खड़े किए थे. बैठक में शामिल होने वालों में देगंगा से विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल, हारोआ से मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट क्षेत्र के अन्य विधायक भी मौजूद थे.

भाजपा सांसद का बड़ा दावा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा सांसद सौमित्र खान ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि टीएमसी के कई सांसद और विधायक पार्टी से नाराज चल रहे हैं. सौमित्र खान ने कहा, अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व एक बार भी हां करता है तो टीएमसी पार्टी नहीं बचेगी. सभी लोग आना चाहते हैं. करीब 50 विधायक और 20 सांसद नाराज हैं और भाजपा में शामिल होना चाहते हैं. उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है.

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