संभल नमाज विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, डीएम-एसपी से कहा- 'इस्तीफा दीजिए या तबादला करवा लीजिए'

संभल में रमजान के दौरान नमाजियों की संख्या सीमित करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थानीय प्रशासन पर सख्त टिप्पणी की है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या तय नहीं की जा सकती और यदि अधिकारी कानून-व्यवस्था संभालने में असमर्थ हैं तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या अपना तबादला करवा लेना चाहिए.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: संभल में रमजान के दौरान नमाज अदा करने से जुड़े विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थानीय प्रशासन के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने नमाजियों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक निर्णय पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मस्जिद में इबादत करने वालों की संख्या तय करना उचित नहीं है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए हर समुदाय को अपने धार्मिक स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का अधिकार सुनिश्चित करे. इस मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच कर रही है.

‘इस्तीफा दीजिए या तबादला करवा लीजिए’

सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन को लगता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी हो सकती है कि मस्जिद के भीतर नमाजियों की संख्या सीमित करनी पड़े, तो अधिकारियों को अपने पद पर बने रहने पर पुनर्विचार करना चाहिए.

कोर्ट ने कहा, "अगर अधिकारी कानून-व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें या तबादला करवा लें."

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन का दायित्व है कि वह हर हाल में कानून का शासन कायम रखे.

राज्य का कर्तव्य है कि…

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि सभी समुदायों को उनके निर्धारित पूजा स्थलों पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का अधिकार मिले.

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई स्थान निजी संपत्ति है, जैसा कि पहले ही न्यायालय तय कर चुका है, तो वहां पूजा-अर्चना के लिए राज्य की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती.

अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य का हस्तक्षेप केवल तब जरूरी होता है जब धार्मिक आयोजन सार्वजनिक भूमि पर किए जा रहे हों या सार्वजनिक संपत्ति तक फैल रहे हों.

रमजान में नमाज पढ़ने से रोके जाने का आरोप

इस मामले में याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट C याचिका दाखिल की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गाटा संख्या 291 पर रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा है.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उस स्थान पर एक मस्जिद स्थित है. हालांकि अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से मस्जिद या किसी ऐसे पूजा स्थल की तस्वीर पेश नहीं की गई, जहां नमाज अदा की जानी थी.

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