'PAK को नोबेल पुरस्कार देने पर विचार...', शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर बोले मौलाना मुफ्ती

युद्धविराम के बाद ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में आज बातचीत होने जा रही है. इस बीच पाकिस्तान में नोबेल पुरस्कार को लेकर अलग चर्चा शुरू हो गई है, जिसे लेकर बरेली से मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है.

Shraddha Mishra

ईरान और अमेरिका के बीच घोषित हुआ दो हफ्तों का युद्धविराम शुरुआत से ही विवादों में घिर गया है. शांति की उम्मीदों के बीच जैसे ही यह समझौता सामने आया, कुछ ही घंटों में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए. इजरायल के हमलों ने इस सीजफायर की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बन गया है. वहीं अब युद्धविराम को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. 

वहीं, अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह युद्धविराम अभी अपने अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाएगा. उनके अनुसार, जब तक पूरी तरह स्थायी शांति स्थापित नहीं होती, तब तक इस पर कोई ठोस निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.

'नोबेल पुरस्कार पर किया जा सकता है विचार'

मौलाना ने कहा कि अगर भविष्य में यह युद्धविराम मजबूत रूप लेता है और पूरी तरह लागू होता है, साथ ही पाकिस्तान इसमें अहम भूमिका निभाता है, तब नोबेल शांति पुरस्कार जैसे सम्मान पर विचार किया जा सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी ऐसे किसी सम्मान की बात करना जल्दबाजी होगी.

उनका कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर हमले जारी हैं, तब तक शांति की बात अधूरी है.  उन्होंने इशारा किया कि इजरायल लगातार लेबनान पर हमले कर रहा है, जिससे हालात और गंभीर हो रहे हैं. मौजूदा समय में केवल ईरान और अमेरिका के बीच ही कुछ हद तक शांति दिखाई दे रही है, लेकिन पूरे क्षेत्र में स्थिरता नहीं है.

पाकिस्तान में नोबेल पुरस्कार की मांग

बता दें कि पाकिस्तान में एक अलग ही चर्चा शुरू हो गई है. पंजाब प्रांत की असेंबली में पीएमएल-एन के एक विधायक द्वारा एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें सेना प्रमुख आसिम मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की मांग की गई है. प्रस्ताव में कहा गया कि बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर अहम भूमिका निभाई है. 

इस्लामाबाद वार्ता पर अनिश्चितता

युद्धविराम के बाद इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की योजना बनाई गई है. हालांकि, इस बैठक को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि इस वार्ता के परिणाम को लेकर अभी कुछ कहना मुश्किल है, क्योंकि हालात पूरी तरह साफ नहीं हैं.

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता में भाग लेने के लिए पाकिस्तान रवाना हो चुके हैं. रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत को लेकर सकारात्मक है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान ईमानदारी से वार्ता में शामिल होता है, तो अमेरिका भी आगे बढ़ेगा. लेकिन किसी भी तरह की धोखाधड़ी या चालबाजी को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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