यूपी कैबिनेट विस्तार: योगी मंत्रिमंडल में छह नए चेहरे, अखिलेश यादव की सामने आई प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी टीम को मजबूत करते हुए अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोट किया। दोनों अब स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री होंगे। पहले ये राज्य मंत्री थे।

Sachin Hari Legha

लखनऊ: रविवार (10 मई 2026) को लखनऊ के जन भवन में उत्तर प्रदेश सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने BJP के छह नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस विस्तार में भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि कृष्ण पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, हंसराज विश्वकर्मा और सुरेंद्र दिलेर ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली।

दो मंत्रियों का कद बढ़ा  

आपको बताते चलें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी टीम को मजबूत करते हुए अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोट किया। दोनों अब स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री होंगे। पहले ये राज्य मंत्री थे। यह विस्तार अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अहम माना जा रहा है।

योगी 2.0 सरकार का यह दूसरा कैबिनेट विस्तार है। इससे पहले मार्च 2024 में पहला विस्तार हुआ था, तब सरकार बने लगभग दो साल हो चुके थे। पिछले विस्तार में SBSP प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, RLD के अनिल कुमार, सुनील कुमार शर्मा और दारा सिंह चौहान को मंत्रिमंडल में जगह दी गई थी। इस बार भी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा गया है।

कैबिनेट विस्तार पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया  

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी कैबिनेट विस्तार को लेकर माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाईट X पर लिखा, “समय बिताने के लिए करना है कुछ काम!  वैसे भी मंत्रिमंडल के विस्तार में तो इनका कोई काम है नहीं। उधर से पर्ची आएगी, यहाँ तो सिर्फ़ पढ़ी जाएगी। भाजपा राज में वैसे भी CM का मतलब बस यही रह गया है: Courier-Messenger. वैसे जनता पूछ रही है कि फ़िल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे बैठकर? जनता का अनुरोध है कि फ़िल्म ध्यान से देखिएगा… हो सकता है ‘कर्मफल-कंसफल’ का सिद्धांत समझकर कुछ जागरण हो जाए और कुछ अच्छा बदलाव भी।   हम तो यही मानते हैं कि मूल रूप से व्यक्ति नहीं उसका ‘लालच-लोभ’ ही बुरा होता है, जो धीरे-धीरे उसका दुराचरण बन जाता है। बुराई इंसान को और बुरा बनाती जाती है।”

उन्होंने आगे यह भी लिखा, “इसके विपरीत ये भी सच है कि जब व्यक्ति ‘स्वार्थ’ को छोड़कर ‘परमार्थ’ के मार्ग पर चल निकलता है तो सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है, वो मानवता के लिए सार्थक साबित हो सकता है। अपने अंदर की सौ बुराइयों के ऊपर चंद अच्छाइयां जीत हासिल कर सकती हैं, यही महाकाव्यों का गहरा आंतरिक संदेश है। अपनी गलतियों और दुर्भावनाओं के लिए प्रायश्चित करने का कोई स्थान नियत नहीं होता है, इसके लिए अंदर का प्रकाश चाहिए जो सैकड़ों लोगों के बीच ‘अंधेरे बंद परिसर’ में भी हो सकता है।”

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो