यूपी कैबिनेट विस्तार में जातीय-सामाजिक संतुलन पर फोकस, 6 नए मंत्रियों को मिल सकती है जगह

सीएम योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल का आखिरी विस्तार हो सकता है क्योंकि अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं.

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Edited By: JBT Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के जिस कैबिनेट विस्तार का बेसब्री से इंतजार था वह आज होने जा रहा है. यह योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल का आखिरी विस्तार हो सकता है क्योंकि अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं. इस विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय प्रतिनिधित्व को संतुलित करने पर खास ध्यान देते हुए नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है.

नए मंत्रियों को मिलेगी जगह

कैबिनेट में बिना किसी मौजूदा मंत्री को हटाए, छह नए मंत्रियों को जगह दी जा सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि इस विस्तार में अवध और पश्चिमी UP क्षेत्रों को ज्यादा अहमियत मिल सकती है खासकर इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी खुद पूर्वाचल क्षेत्र से सांसद हैं. इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और BJP के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी पूर्वाचल से ही आते हैं.

पूर्व मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी

कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलेगी इसे लेकर ज़ोरदार अटकलें लगाई जा रही हैं. इन नामों में सबसे आगे पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम है. भूपेंद्र चौधरी पहले भी योगी कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं. प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने के बाद उन्होंने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. फिलहाल भूपेंद्र चौधरी विधान परिषद के सदस्य (MLC) के तौर पर कार्यरत हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक है.

पूजा पाल को मंत्री बनाया जा सकता है

रायबरेली से मनोज पांडे और कौशांबी से पूजा पाल जिन्होंने राज्यसभा चुनावों के दौरान समाजवादी पार्टी के खिलाफ जाकर BJP उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला था उनको मंत्री बनाया जा सकता है. मनोज पांडे पहले समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान मंत्री रह चुके हैं. जहां एक तरफ कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में भेजने की चर्चा है वहीं यह भी अटकलें हैं कि जो लोग अभी पार्टी संगठन में काम कर रहे हैं. उन्हें कैबिनेट में मंत्री के तौर पर शामिल किया जा सकता है.

मनोज पांडे कैबिनेट विस्तार में एकमात्र सवर्ण

मनोज पांडे जिन्होंने समाजवादी पार्टी के खिलाफ बगावत की थी. रायबरेली ज़िले की ऊंचाहार विधानसभा सीट से विधायक (MLA) हैं. मनोज पांडे ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और अवध क्षेत्र के रहने वाले हैं. इसके विपरीत पूजा पाल कौशांबी जिले की चैल विधानसभा सीट से गड़रिया समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला विधायक हैं. पूजा पाल, जो दिवंगत राजू पाल की पत्नी हैं इससे पहले वो समाजवादी पार्टी की विधायक थीं. अतीक अहमद की हत्या के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान जारी कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपना खुला समर्थन व्यक्त किया. इससे नाराज होकर SP ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया और निष्कासित कर दिया.

ये नाम भी शामिल

BJP विधायकों में प्रमुख नामों में कृष्ण पासवान, अशोक कटारिया, हंसराज विश्वकर्मा, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत शामिल हैं. कृष्ण पासवान फतेहपुर की खागा विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं. कृष्ण पटेल ने पहले भी BJP के संगठनात्मक ढांचे में काम किया है. अशोक कटारिया गुर्जर समुदाय से आते हैं. हंसराज विश्वकर्मा, जो OBC समुदाय से हैं, वर्तमान में MLC के रूप में कार्यरत हैं.

सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत की भी चर्चा

सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक हैं. दिलेर वाल्मीकि समुदाय के नेता हैं. उनका पारिवारिक राजनीतिक इतिहास भी रहा है. जो ऐतिहासिक रूप से काफी मज़बूत रहा है. कैलाश राजपूत कन्नौज की तिरवा विधानसभा सीट से विधायक हैं. वे लोध समुदाय से आते हैं. तिरवा क्षेत्र को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. इन लोगों के अलावा, सुरेश पासी के नाम की भी इस समय चर्चा हो रही है. सुरेश पासी की किस्मत तभी चमकने की संभावना है जब कृष्ण पासवान का नाम सूची से हटा दिया जाए.

ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने का एक अवसर

जाति और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए BJP अनुसूचित जातियों (SC) और अन्य पिछड़ा वर्गों (OBC) पर विशेष जोर देती नजर आ रही है. इसके अलावा  ब्राह्मणों के बीच हाल ही में सामने आई नाराज़गी को देखते हुए उच्च-जाति समुदाय से आने वाले किसी ब्राह्मण नेता की राजनीतिक किस्मत भी चमक सकती है. पासी समुदाय और अनुसूचित जातियों के बीच अपना समर्थन मज़बूत करने की रणनीति के तहत, BJP अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी से आने वाले नेताओं को पद देने की ओर झुकी हुई नजर आ रही है.

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