उत्तराखंड: उत्तराखंड के हजारों सरकारी शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. राज्य सरकार अब ऐसे शिक्षकों के लिए नियमों में बदलाव करने जा रही है, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून लागू होने से पहले हुई थी. प्रस्तावित बदलाव के बाद वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षक भी अध्यापक पात्रता परीक्षा (TET) में शामिल हो सकेंगे. लंबे समय से इस मांग को लेकर आवाज उठ रही थी और अब सरकार की पहल से हजारों शिक्षकों की चिंता कम होने की उम्मीद है.
शिक्षा विभाग के अनुसार इस फैसले का सीधा लाभ करीब 24 हजार शिक्षकों को मिलेगा. शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने बताया कि नियमों में संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और इसे आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा. कई शिक्षक वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान पात्रता मानकों के कारण वे टीईटी परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे थे. नई व्यवस्था लागू होने के बाद उनके लिए परीक्षा का रास्ता खुल जाएगा.
सरकारी स्कूलों में वर्ष 2011 से पहले शिक्षकों की भर्ती अलग नियमों के आधार पर होती थी. उस समय नियुक्ति के लिए आज की तरह टीईटी या अन्य आधुनिक पात्रता शर्तें लागू नहीं थीं. कई शिक्षकों की नियुक्ति विशेष बीटीसी (Special BTC) जैसी व्यवस्थाओं के तहत हुई थी. ऐसे शिक्षकों के पास वर्तमान नियमों के अनुसार डीएलएड या अन्य निर्धारित योग्यताएं नहीं हैं. इसी वजह से वे टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे. सरकार का मानना है कि लंबे समय से पढ़ा रहे इन शिक्षकों को अवसर दिया जाना चाहिए ताकि वे अपनी सेवा को नियमों के अनुरूप जारी रख सकें.
टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है. अदालत ने हाल ही में शिक्षकों को राहत देते हुए परीक्षा पास करने की समय सीमा बढ़ा दी थी. अब शिक्षकों के पास 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का समय है. इस अवधि के भीतर परीक्षा पास नहीं करने पर संबंधित शिक्षकों के सामने सेवा संबंधी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं. हालांकि अदालत ने उन शिक्षकों को छूट दी है जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम समय बचा है. ऐसे शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं होगी.
राज्य के कई शिक्षक पिछले दो से तीन दशकों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है जो लंबे अनुभव के बावजूद वर्तमान नियमों के कारण असमंजस में थे. उदाहरण के तौर पर कई वरिष्ठ शिक्षक, जो वर्षों से विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं, अब अपनी नौकरी और सेवा शर्तों को सुरक्षित रखने के लिए टीईटी पास करने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार का नया प्रस्ताव ऐसे शिक्षकों के लिए राहत का रास्ता खोल सकता है.
इस मुद्दे को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने शिक्षा निदेशालय में अधिकारियों से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने अपर निदेशक और संयुक्त निदेशक को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं. शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दी जानी चाहिए. उनका तर्क है कि उन्होंने वर्षों तक सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य किया है और अब उन पर नई शर्तें लागू करना उचित नहीं होगा. इसके अलावा शिक्षकों ने यह भी मांग की कि जिन औपबंधिक शिक्षकों की वेतन वृद्धि रुकी हुई है, उसे टीईटी पास करने के बाद नियमित रूप से बहाल किया जाए. First Updated : Sunday, 07 June 2026