नई दिल्ली: प्राकृतिक आपदाओं से अक्सर जूझने वाला उत्तराखंड अब आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक मिसाल बनता जा रहा है. कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में राज्य की त्वरित कार्रवाई, बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों के उपयोग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है. हाल ही में आयोजित ब्रिक्स देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल को विशेष रूप से सराहा गया. खासकर धराली आपदा और सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान को उत्कृष्ट उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया गया.
भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में 3 से 5 जून तक ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) कार्य समूह की दूसरी तकनीकी बैठक आयोजित की गई. इस सम्मेलन में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात समेत 11 सदस्य और सहयोगी देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. बैठक में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व एसडीआरएफ के सेनानायक अर्पण यदुवंशी और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने किया. उन्होंने राज्य में चल रहे आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों और सफल बचाव अभियानों की विस्तृत जानकारी साझा की.
सम्मेलन के दौरान उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान और धराली आपदा राहत कार्य को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया. इन दोनों अभियानों में एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हुए कई लोगों की जान बचाई थी. अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्तराखंड ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जिस तरह धैर्य, तकनीक और प्रशासनिक समन्वय का परिचय दिया, वह अन्य देशों के लिए भी सीखने योग्य मॉडल है.
एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने बताया कि राज्य में आपदा जोखिम को कम करने के लिए वैज्ञानिक योजना और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम किया जा रहा है. वहीं निदेशक शांतनु सरकार ने कहा कि पूर्व चेतावनी प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने उत्तराखंड के राहत एवं बचाव अभियानों को तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता का शानदार उदाहरण बताया. उनका मानना था कि किसी भी आपदा के दौरान त्वरित निर्णय, आधुनिक उपकरणों का उपयोग और विभिन्न विभागों का सामूहिक प्रयास सफलता की कुंजी साबित हुआ.
उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित धराली कस्बे ने 5 अगस्त 2025 को एक भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना किया था. बादल फटने के बाद खीर गंगा नदी में भारी मात्रा में मलबा आया, जिसने पूरे इलाके को बुरी तरह प्रभावित कर दिया. इस आपदा के बाद एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी और वायुसेना ने मिलकर बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया. प्रभावित क्षेत्रों से सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया और लगातार कई दिनों तक राहत कार्य जारी रहा.
उत्तरकाशी जिले में स्थित सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है. 12 नवंबर 2023 को भूस्खलन के कारण सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे 41 मजदूर अंदर फंस गए थे. इसके बाद शुरू हुआ बचाव अभियान देश के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशनों में शामिल हो गया. लगभग 17 दिनों तक चले इस अभियान में विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर काम किया और आखिरकार सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
इस सफल अभियान ने न केवल देश बल्कि दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया. अब ब्रिक्स सम्मेलन में भी इसे आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों के बेहतरीन उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है. उत्तराखंड के इन अभियानों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना यह साबित करती है कि राज्य ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मजबूत व्यवस्था विकसित की है. बेहतर योजना, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित टीमों के बल पर उत्तराखंड अब इस क्षेत्र में एक प्रभावशाली मॉडल के रूप में उभर रहा है. First Updated : Monday, 08 June 2026