पश्चिम बंगाल में इस समय बीजेपी की सरकार है। टीएमसी की सत्ता जा चुकी है। विधानसभा में जो पार्टी सत्ता में होती है उसके मुखिया मुख्यमंत्री होते हैं लेकिन विपक्ष का एक मुखिया होता जिसे नेता प्रतिपक्ष कहते हैं और इसी पद को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा के स्पीकर हैं रथिंद्रनाथ बोस। अब नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सोवनदेब चट्टोपाध्याय के पास थी लेकिन स्पीकर रथींद्रनाथ बोस ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ऋतब्रज बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष मान लिया और उन्हें इस पद की मान्यता दे दी। ऋतब्रज बनर्जी टीएमसी के नेता ही है लेकिन चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने अपनी पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी।
टीएमसी को यह फैसला मंजूर नहीं है। पार्टी का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति स्पीकर अपनी मर्जी से नहीं कर सकते। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि विधानसभा में किसी पार्टी के कितने विधायक हैं, कौन सी पार्टी असपी विपक्ष है और राजनीतिक हकीकत क्या है। टीएमसी का आरोप है कि स्पीकर ने एक बागी नेता को यह अहम पद देकर विधानसभा की पुरानी परंपराओं को तोड़ा और राजनीतिक संतुलन बिगाड़ा है। टीएमसी इसी को लेकर हाईकोर्ट गई है। फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 16 जून तय की है। उस दिन दोनों पक्षों की दलीलें और सुनी जाएंगी और इसके बाद कोई बड़ा फैसला आ सकता है। First Updated : Thursday, 11 June 2026