एक समय ऐसा था जब पाकिस्तान खुद को मुस्लिम देशों का सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार साबित करने की कोशिश करता था और “मुस्लिम नाटो” जैसे विचारों को आगे बढ़ा रहा था। लेकिन अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रभावशाली खाड़ी देश अब भारत के साथ अपने रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। यही नहीं, UAE और इजरायल के बीच भी पिछले कुछ वर्षों में रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। दूसरी तरफ भारत और इजरायल पहले से ही रणनीतिक सहयोगी रहे हैं। ऐसे में अब एक ऐसी नई तिकड़ी बनती दिख रही है जो आने वाले समय में एशिया और मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
15 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से हुई। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को छोटी लेकिन बेहद सकारात्मक करार दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा से भारत और UAE के बीच कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और अधिक मजबूत हुई है।
दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, ब्लू इकॉनमी, रक्षा सहयोग, तकनीक, फिनटेक, निवेश और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही दोनों नेताओं ने लोगों के बीच आपसी संपर्क और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी जोर दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह यात्रा सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में UAE और इजरायल के बीच संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। अब दोनों देश रक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। भारत के दोनों देशों के साथ मजबूत रिश्ते हैं। ऐसे में यह त्रिकोणीय साझेदारी आने वाले समय में एशिया की नई शक्ति धुरी बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की अत्याधुनिक तकनीक, भारत की इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तथा UAE की आर्थिक ताकत मिलकर रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी और मिसाइल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की संभावना बढ़ गई है।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि UAE का प्रभाव सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कई देशों में भी उसकी मजबूत पकड़ है। इसका सीधा फायदा भारत को मिल सकता है। भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और बराक मिसाइल जैसे रक्षा उपकरणों के लिए UAE एक बड़ा निवेशक और खरीदार बन सकता है।
इसके अलावा भारत, UAE और इजरायल मिलकर भविष्य में कई आधुनिक हथियार प्रणालियों का संयुक्त विकास भी कर सकते हैं। इससे भारत को रक्षा निर्यात बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यह गठबंधन चीन और पाकिस्तान के लिए रणनीतिक चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पूरी दुनिया के लिए बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग बन चुका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रूट से हासिल करता है। ऐसे में किसी भी संघर्ष या रुकावट का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए भारत और UAE अब नए विकल्पों पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक UAE के फुजैराह पोर्ट से भारत तक ऊर्जा आपूर्ति के नए कॉरिडोर और पाइपलाइन विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इस तरह की परियोजनाओं में समय लगेगा, लेकिन इससे भविष्य में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हो सकती है।
भारत-UAE-इजरायल की बढ़ती नजदीकियों को चीन और पाकिस्तान दोनों बेहद ध्यान से देख रहे हैं। चीन पहले से ही पाकिस्तान के जरिए पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। वहीं पाकिस्तान खुद को इस्लामिक देशों का बड़ा रणनीतिक चेहरा साबित करने की कोशिश करता रहा है।
लेकिन UAE जैसे प्रभावशाली मुस्लिम देश का भारत और इजरायल के साथ तेजी से बढ़ता सहयोग पाकिस्तान की रणनीति को कमजोर कर सकता है। यही कारण है कि अब पाकिस्तान की “मुस्लिम नाटो” वाली सोच जमीन पर कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
यह गठबंधन सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर टेक्नोलॉजी, फिनटेक, सेमीकंडक्टर और ब्लू इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में भी तीनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। भारत के विशाल बाजार, इजरायल की तकनीकी विशेषज्ञता और UAE की पूंजी मिलकर एशिया में नई आर्थिक शक्ति तैयार कर सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र की राजनीति और अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है। भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक रणनीतिक खिलाड़ी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। First Updated : Saturday, 16 May 2026